चंबल नदी में अवैध बजरी खनन और परिवहन पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। अवैध बजरी परिवहन पर रोक लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने ठोस कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। जिला प्रशासन के साथ वन, खनन और पुलिस विभाग के अधिकारी पिछले एक सप्ताह से लगातार रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। इसका उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए घाटों और परिवहन मार्गों की निगरानी बढ़ाना है। इसी क्रम में 1 मई को केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल धौलपुर पहुंचे। उनकी टीम ने चंबल नदी के विभिन्न घाटों और बजरी निकासी के रास्तों का मौके पर निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। धौलपुर दौरे के दौरान गोयल ने जिला कलेक्ट्रेट में राजस्थान और मध्यप्रदेश के अधिकारियों के साथ चंबल बजरी को लेकर महत्वपूर्ण बैठक भी की। इसके बाद टीम ने चंबल नदी किनारे बोटिंग के जरिए अवैध खनन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। साथ ही मध्यप्रदेश और राजस्थान पुलिस द्वारा घाटों पर लगाए गए चेक पोस्टों का भी निरीक्षण किया गया। यह गौरतलब है कि हाल ही में मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में बजरी माफिया के वाहन से कुचलकर एक वनकर्मी की मौत का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए अवैध बजरी खनन पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित राज्यों से प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर मई माह में प्रस्तुत करने को कहा है। इसी के मद्देनजर प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है, ताकि चंबल नदी में अवैध खनन पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सके।