परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और निजी-सरकारी स्कूलों की बसों के साथ अन्य बाल वाहिनियों की लगातार जांच कर रहे हैं। गुरुवार को शहर के प्रताप सर्किल में बसों की चेकिंग हुई हैं। इस दौरान बसों की सुरक्षा व्यवस्था, जरूरी सुविधाएं और सभी डॉक्यूमेंट्स की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वालों के चालान भी काटे जा रहे है। हर छोटी-बड़ी चीज पर रखी जा रही नजर जिला परिवहन अधिकारी (DTO) दयाशंकर गुप्ता ने बताया- जांच के दौरान सबसे पहले बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र की जांच की जा रही है। इसके साथ ही गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, परमिट और रोड टैक्स की वैधता भी देखी जा रही है। बसों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस सिस्टम लगा है या नहीं, इमरजेंसी एग्जिट सही हालत में है या नहीं तथा दरवाजों और खिड़कियों पर सुरक्षा ग्रिल और जालियां लगी हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। किसी भी तरह की कमी मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। ड्राइवर तक की हो रही जांच दयाशंकर गुप्ता ने बताया- जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बस का रंग नियमों के अनुसार है या नहीं। गाड़ी के आगे 'ऑन स्कूल ड्यूटी' और पीछे 'स्कूल बस' लिखा होना जरूरी है। बस पर स्कूल का नाम, पता, फोन नंबर, ड्राइवर का नाम और मोबाइल नंबर भी लिखा होना चाहिए। पीली पट्टी लगी है या नहीं, दरवाजों की लॉकिंग व्यवस्था ठीक है या नहीं, खिड़कियों और दरवाजों पर सुरक्षा ग्रिल लगी है या नहीं, इसकी भी जांच हो रही है। इसके अलावा शीशों पर काली फिल्म नहीं हो, पीने के पानी की व्यवस्था हो, विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए सुविधा हो, सीट क्षमता से ज्यादा बच्चे नहीं बैठाए जा रहे हों और ड्राइवर का अनुभव, मेडिकल परीक्षण, चालान रिकॉर्ड, आरसी तथा गाड़ी के संचालन से जुड़े सभी नियमों की भी जांच की जा रही है। स्कूल परिसर में बसों के संचालन की व्यवस्था भी देखी जा रही है। पूरे जिले के लिए अलग-अलग अधिकारियों को जिम्मेदारी DTO ने बताया- जांच अभियान पूरे जिले में लगातार चलेगा। इसके लिए अलग-अलग क्षेत्रों में परिवहन निरीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। चित्तौड़गढ़ शहर और आरटीओ कार्यालय क्षेत्र की जिम्मेदारी शकील अली को दी गई है। बेगूं और रावतभाटा क्षेत्र की जिम्मेदारी रविंद्र झुरिया, कपासन और भूपालसागर की जिम्मेदारी विक्रम सालवी तथा निम्बाहेड़ा और बड़ीसादड़ी क्षेत्र की जिम्मेदारी सतीश मीणा को सौंपी गई है। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाकर बसों और अन्य बाल वाहिनियों की जांच करेंगे। विभाग का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का पालन नहीं करने वाली गाड़ियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।