नशे की शुरुआत अक्सर गलत संगति से होती है। जो दोस्त गलत काम में साथ दे, वह सच्चा मित्र नहीं है। असली मित्र वही है जो गलत कदम उठाने पर हाथ पकड़कर वापस खींच ले। बच्चों को नशे से बचाना है तो उनकी संगति के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत करनी होगी। यह बात श्रमणसंघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषि ने गुरुवार को शांतिभवन में अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल के पांचवीं से दशवीं तक के 175 से अधिक विद्यार्थियों से विशेष संवाद के दौरान कही। युवाचार्यश्री ने कहा कि स्कूल केवल अच्छे अंक लाने की जगह नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने की तैयारी का केंद्र है। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चों की प्रतिभा निखारे, शरीर को मजबूत बनाए और मुश्किल परिस्थितियों में सही निर्णय लेने का साहस दे। तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि तकनीक को मददगार बनाएं, उसे अपनी सोचने की ताकत का विकल्प न बनने दें। अंकों और रैंकिंग पर उन्होंने कहा कि प्रथम आना अच्छी उपलब्धि है, लेकिन कम अंक आने का मतलब असफल होना नहीं है। अंक बच्चे की पूरी योग्यता नहीं। मित्रता पर बच्चों से सीधा संवाद करते हुए युवाचार्यश्री ने पूछा कि सच्चा मित्र कौन होता है। उन्होंने कहा कि मित्र वही है जो आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे, गलत कदम उठाने से रोके और मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे। उन्होंने कहा कि बचपन और किशोरावस्था अच्छी आदतें विकसित करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। खेल, अनुशासन, पढ़ने की आदत, परिवार के प्रति संवेदनशीलता और स्वयं सोचने का अभ्यास बच्चों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाते हैं। स्कूल से प्रमाणपत्र के साथ अच्छे संस्कार, मजबूत शरीर और सही निर्णय लेने की क्षमता लेकर निकलना ही शिक्षा की असली सफलता है। संवाद के समापन पर विद्यार्थियों ने जीवनभर नशे से दूर रहने और गलत संगति में नहीं पड़ने का संकल्प लिया। बच्चों ने अपने मित्रों को भी नशे से बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन के लिए प्रेरित करने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर अरिहंत इंटरनेशनल स्कूल के चेयरमैन पंकज सूरिया, सचिव अजय चौरड़िया, प्रिंसिपल प्रतिमा यादव और स्कूल प्रबंधक सूरजमल जैन आदि ने युवाचार्यश्री से आशीर्वाद लिया। गलत राह पर जाने से रोकता है सच्चा मित्र