गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद सोमवार से प्रदेशभर के सरकारी स्कूल खुल गए हैं। इसके साथ ही मानसून भी आने को तैयार है, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं और स्कूली स्टाफ की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विद्यार्थियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए हिदायत दी गई है कि किसी भी हाल में बच्चों को जर्जर, असुरक्षित या छत टपकने वाले कमरों में नहीं बैठाया जाए। ऐसे जर्जर भवनों को तुरंत बांस, रस्सी या खतरे का निशान लगाकर बैरीकेड किया जाए, ताकि बच्चे वहां न जा सकें। शिक्षा विभाग की गाइडलाइन, इन 6 बिंदुओं पर होगा फोकस 1. छतों की सफाई-जलभराव से मुक्ति : स्कूल खुलते ही सबसे पहले भवनों की छतों और बरसाती नालों की सफाई की जाएगी, ताकि पानी जमा न हो। भवन की नींव के पास भी पानी नहीं इकट्ठा होने दिया जाएगा। 2. जर्जर भवन गिराने की मॉनिटरिंग : जो स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उन्हें नियमानुसार तुरंत सुरक्षित तरीके से जमींदोज (ध्वस्त) करने के निर्देश दिए गए हैं। 3. बिजली के खुले तारों पर टेपिंग : स्कूल परिसरों में बिजली की वायरिंग दुरुस्त की जाएगी। कहीं भी खुले तार दिखने पर तुरंत टेपिंग होगी ताकि करंट का खतरा न रहे। 4. पानी के स्रोतों पर पाबंदी : बच्चे पेयजल के लिए बनी टंकियों, कुओं या अन्य जल स्रोतों के पास अकेले नहीं जा सकेंगे। टंकियों की नियमित सफाई कर उस पर तारीख लिखी जाएगी। 5. शौचालयों में रनिंग वाटर : सभी स्कूलों, विशेषकर छात्राओं के शौचालयों में नियमित साफ-सफाई, दरवाजों की मरम्मत और रनिंग वॉटर (बहते पानी) की व्यवस्था अनिवार्य की गई”है। 6. आपदा प्रबंधन-सुरक्षित निकास मैप : हर स्कूल में प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए एक सुरक्षित निकास योजना का मानचित्र (मैप) बनाया जाएगा और बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी। खुले में या पेड़ के नीचे क्लास लगी तो डीईओ होंगे जिम्मेदार आदेश में सख्त लहजे में कहा गया है कि जिन स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है, वे वैकल्पिक सुरक्षित भवनों में चलेंगे। यदि कोई भी स्कूल खुले में, झोपड़ी में या पेड़ के नीचे संचालित होता पाया गया, तो इसके लिए सीधे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों को केवल कागजी रिपोर्ट न देखकर खुद फील्ड में जाकर रैंडम निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही प्राकृतिक आपदा या किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्कूल के सूचना पट्ट पर निकटतम अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिस स्टेशन और फायर ब्रिगेड के फोन नंबर और जिम्मेदार अधिकारियों के मोबाइल नंबर लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। उदयपुर के जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. लोकेश भारती के अनुसार हमने तैयारियां शुरू कर दी है। सभी सीबीईओ को कहा गया है कि सतर्कता बरतने के लिए एक्टिव रहें।