एफएसएसएआई के साफ निर्देश हैं कि दूध बेचने वाले सभी विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस अनिवार्य है। बिना पंजीकरण दूध बेचना गैरकानूनी माना जाएगा और इस पर जुर्माना, माल जब्ती और कारोबार बंद करने जैसी कार्रवाई हो सकती है। एफएसएसएआई ने टर्नओवर के आधार पर लाइसेंस व्यवस्था में बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत ₹1.5 करोड़ तक सालाना आय वाले विक्रेताओं को केवल रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसकी फीस ₹100 रुपए है। 1.5 करोड़ रुपए से ₹50 करोड़ तक आय वाले कारोबारियों को स्टेट लाइसेंस और ₹50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वालों को सेंट्रल लाइसेंस लेना होगा। नियमों में डेयरी यूनिट, दूध उत्पादक और खुले में दूध बेचने वाले सभी विक्रेता शामिल हैं। छोटे दूध विक्रेताओं के लिए रजिस्ट्रेशन और बड़े ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। पहले यह सीमा 12 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दिया गया है। 1000 लाख लीटर उत्पादन, 400 लाख लीटर खुला प्रत्येक 5 में 1 सैंपल फेल, 25 अनसेफ एक्सपर्ट - लंबे समय में लीवर-किडनी पर असर ऐसे होती है मिलावट घर पर ऐसे पहचानें मिलावटी - (एक्सपर्ट: मनीष फौजदार, एमडी, जयपुर डेयरी)