इस बार की फसल से पक्की रसोई और रहने के लिए मकान बनाने की सोची थी, लेकिन बेमौसम बारिश ने सारे सपने चकनाचूर कर दिए। आमदनी तो दूर, लागत और कर्ज के बोझ ने कमर ही तोड़ दी। यह दर्द है सीकर के कुड़ली गांव की किसान झिमकोरी देवी का। बारिश ने झिमकोरी देवी की 24 बीघा में लहलहाती फसल को तबाह कर दिया है। झिमकोरी देवी अकेली नहीं हैं, जिले के ज्यादातर किसानों की यही व्यथा है। पिछले 15 दिन से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कहीं चने तो कहीं गेहूं की बालियां टूटकर खेत में ही बिखर गईं। दैनिक भास्कर की टीम ने सीकर के उन गांवों का दौरा किया, जो बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। पड़ताल में सामने आया कि गेहूं, सरसों, चना, मेथी और जौ की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सीकर में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते 18-19 मार्च और 6-7 अप्रैल को तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। गिरदावरी रिपोर्ट में फसल का नुकसान केवल 18-20 प्रतिशत किए जाने से किसानों में आक्रोश है। निराश किसानों ने प्रशासन से विशेष गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिलाने और 6 महीने का बिजली बिल माफ करने की मांग की है। पढ़िए यह रिपोर्ट… अनाज के ढेर में घुसा पानी झिमकोरी देवी ने बताया- 24 बीघा में गेहूं, मेथी और प्याज का पूरा नुकसान हो गया। गाय-भैंस का चारा भी पूरी तरह भीगकर खराब हो गया। हर तरह से घाटा हो गया। पिछली फसल की बचत मजदूरी देने में चली गई। 15 दिन से रुक-रुककर होती रही बारिश ने फसल चौपट कर दी। गेहूं और मेथी की फसल को तिरपाल से ढककर रखा था, लेकिन बारिश इतनी ज्यादा हुई कि खेतों में पानी भर गया। अनाज के ढेर में पानी घुसने से सबकुछ सड़ गया। बच्चों की फीस दें या खेत का किराया सीकर के सालासर के पास अणकोल्या गांव के किसान भूराराम ने बताया- किराए पर 54 बीघा जमीन लेकर खेती कर रहा हूं, ताकि 2 वक्त की रोटी के साथ बच्चों की पढ़ाई भी करवा सकूं। चने की फसल उगाई थी। बारिश और ओलों से सब तबाह हो गया। अब बुवाई का खर्चा दें और खेत का किराया दें या बच्चों की फीस, कुछ समझ नहीं आ रहा। मजदूरी करके पेट पालते हैं, लेकिन फसल नष्ट हो गई। भूराराम का बेटा कन्हैयालाल 9वीं, मुकेश 7वीं और बेटी लक्षिता 8वीं क्लास में है। किसान से राम और राज दोनों नाराज कुड़ली गांव के किसान तनसुख ओला ने बताया- इस बार किसान से राम और राज दोनों ही नाराज हैं। राम (मौसम) और राज (सरकार) की मार से किसान दुखी हैं। किसानों की सरकार से मांग है कि बारिश-ओलों से हुए नुकसान को देखते हुए विशेष गिरदावरी करवाई जाए किसानों को आर्थिक मार से बचाने के लिए कृषि कनेक्शन का 6 महीने का बिजली बिल माफ किया जाए। बीमा कंपनी वाले ऑनलाइन क्लेम के लिए कहते हैं, लेकिन जिन किसानों के पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है, वे परेशान हैं। सरकारी पोर्टल पर 15 दिन से बार-बार एप्लाई करने पर भी बिजी आ रहा है। खड़ी फसल ही काली पड़ गई बालाजी-भैरूंजी नगर के किसान मुकेश कुमार ने बताया- गेहूं और मेथी दाना की फसल में काफी नुकसान हुआ है। चने की फसल खराब हो गई है। खड़ी फसल ही काली पड़ गई है। फसल में मजदूरी लग गई, वो आर्थिक नुकसान अलग से हुआ है। नुकसान का करवा रहे सर्वे सीकर एडिशनल जिला कलेक्टर डॉ. रतन कुमार स्वामी ने बताया- सीकर जिले में बारिश-ओलावृष्टि हुई है। CM के निर्देशानुसार सभी तहसीलदारों को फसलों के नुकसान का सर्वे करवाने के निर्देश दे दिए हैं। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सीकर में भारी बारिश का दौर एकबारगी रुक गया है। किसानों को पूरी तरह संतुष्ट करने का प्रयास किया जाएगा। तस्वीरों में देखिए फसलों का नुकसान… ---
बारिश से फसलें खराब से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. किसान बोले- मन करता है सुसाइड कर लूं:ओलों से खेतों में तैयार फसलें बर्बाद हुईं; महिला बोलीं- बच्चों को पालने पर संकट खड़ा हुआ 3 अप्रैल की दोपहर, घड़ी में 3 बजकर 15 मिनट हुए थे। आसमान से ऐसी ‘आफत’ बरसी की कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। लगातार 20 मिनट तक (3:35 बजे तक) हुई भारी ओलावृष्टि ने श्रीगंगानगर जिले के 15 से ज्यादा गांवों की तैयार फसलों को बर्बाद करके रख दिया। पढ़ें पूरी खबर 2. बारिश-ओले से पकी फसलें मिट्टी में मिलीं:पोती की शादी का सपना टूटा, बिटिया को पढ़ने के लिए शहर भेजने की आस बिखरी ‘20 बीघा में मैंने गेहूं की फसल बोई थी। 30 से 35 क्विंटल तक फसल होने की उम्मीद थी। बारिश और ओलावृष्टि ने उम्मीद पर पानी फेर दिया है। 4 से 5 लाख का नुकसान हुआ है। अब सरकार से मदद की आस है।’ पढ़ें पूरी खबर