जब पारंपरिक फसलों ने जवाब दे दिया और मेहनत के बदले घाटा मिलने लगा, तो बहरोड़ के खेड़की गांव के सुनील यादव (48) ने हार मानने के बजाय रास्ता बदलने का फैसला किया। आज उनका खेत सिर्फ फसल नहीं, बल्कि पूरे इलाके के लिए आधुनिक खेती का एक मॉडल बन चुका है। सुनील ने परंपरागत खेती को छोड़कर साल 2021 से सब्जियों की खेती में नवाचार किया। महज 5 साल के उनके इस प्रयोग ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि उन्हें एक सफल 'एग्री-इंटरप्रेन्योर' के रूप में पहचान दिलाई है। अब सब्जियों की आधुनिक खेती से तस्वीर बदल गई है। 10 बीघा में शिमला मिर्च और जुकिनी (एक प्रकार की विदेशी सब्जी) की खेती से दो महीने में 8 लाख रुपए की कमाई हो चुकी है। अभी करीब 10 लाख रुपए की कमाई और होने का अनुमान है। म्हारे देस की खेती में इस बार बात बहरोड़ के किसान सुनील यादव की… 8 बीघा में शिमला मिर्च सुनील यादव ने बताया - फैक्ट्रियों से निकलने वाले पॉल्यूशन की वजह से कपास व अन्य फसलों में नुकसान हो रहा था। स्थानीय साथी किसान के कहने पर खेती पैटर्न बदलने पर विचार किया। दिसंबर 2025 में 8 बीघा खेत में करीब 56 हजार शिमला मिर्च के पौधे लगाए गए। यानी प्रति बीघा 6 से 7 हजार पौधे तैयार किए गए। पौधों को तैयार होने में करीब 60 दिन लगते हैं। फरवरी में पहली तुड़ाई शुरू हुई। अब तक 6 तुड़ाइयां हो चुकी हैं। मई के अंत तक कुल 9 बार तुड़ाई होगी। यानी एक बार तुड़ाई के 10 दिन बाद पौधे पर फिर से मिर्च तैयार हो जाती है। पौधे की रोपाई से लेकर अंतिम तुड़ाई तक यह लगभग पांच महीने की फसल होती है। एक पौधे से एक बार में औसतन 700 ग्राम मिर्च मिलती है। एक बार में 10-12 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन
सुनील यादव बताते हैं- एक बार की तुड़ाई में प्रति बीघा 10 से 12 क्विंटल तक मिर्च निकल रही है। औसतन हर 10 दिन में तुड़ाई की जा रही है। अब तक 6 बार तुड़ाई हो चुकी है और अप्रैल-मई में 3-3 बार और तुड़ाई होगी। वर्तमान में बाजार में मिर्च का भाव 20 से 25 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। अब तक करीब 8 लाख रुपए की शिमला मिर्च बेच चुके हैं। इस हिसाब से एक बीघा में खर्च निकालने के बाद 80 से 90 हजार रुपए तक की आमदनी हो रही है। करीब 10 लाख रुपए की कुल आय संभावित है। 2 बीघा में जुकिनी की खेती, पंजाब तक सप्लाई
सुनील यादव बताते हैं कि शिमला मिर्च के साथ 2 बीघा में जुकिनी की खेती भी की है। यह एक उन्नत किस्म है, जिसकी बुवाई नवंबर में की गई थी और 15 फरवरी के आसपास पहली तुड़ाई शुरू हुई। जुकिनी में एक बीघा से एक बार की तुड़ाई में 20 से 25 क्विंटल उत्पादन मिल रहा है। फरवरी और मार्च में अब तक कई बार तुड़ाई हो चुकी है। इस फसल का अधिकतर माल पंजाब की मंडियों में भेजा जा रहा है। हालांकि इस बार बाजार में जुकिनी का भाव 5 से 6 रुपए प्रति किलो ही मिल रहा है, जिससे मुनाफा सीमित रहा। अब तक करीब 2 लाख रुपए की बिक्री हो चुकी है और लगभग सवा लाख रुपए की बचत हुई है। पौध तैयार कर लगाने से समय की बचत और उत्पादन ज्यादा
सुनील यादव बताते हैं कि शिमला मिर्च की इंद्रा वैरायटी की पहले बीज से पौध तैयार की जाती है। पौध कॉकोपिट में तैयार की जाती है। इससे पौधे स्वस्थ और मजबूत बनते हैं। जड़ों में किसी प्रकार की बीमारी नहीं लगती है। करीब एक महीने में पौध तैयार हो जाती है। इसके बाद इन्हें खेत में बेड बनाकर लगाया जाता है। खेत में रोपाई के बाद भी लगभग एक महीने में पौधे पूरी तरह विकसित हो जाते हैं और कुल मिलाकर पौध तैयार करने से लेकर करीब 60 दिन में मिर्च आनी शुरू हो जाती है। पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई का उपयोग किया जाता है। कोरियन जुकिनी की पौध भी पहले तैयार की जाती है और फिर खेत में बेड पर लगाई जाती है। किसान के अनुसार, पहले से पौध तैयार कर लगाने से समय की बचत होती है और पैदावार भी अच्छी मिलती है। इससे पौधों का विकास बेहतर होता है और बीमारियों का खतरा कम रहता है। साथ ही, अगर खेत में पहले से कोई फसल खड़ी हो तो छोटी जगह में पौध तैयार कर समय का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। 35 मजदूरों को रोजगार
इस पूरी खेती में करीब 35 महिला और पुरुष मजदूर कार्यरत हैं। तुड़ाई और देखभाल के लिए लगातार काम मिल रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। हर मजदूर को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है, जिससे फसल की बेहतर देखभाल हो सके। --- खेती-किसानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए... दो बीघा में लगाया 'सिंदूरी' अनार, सालाना लाखों की कमाई:गुजरात से मंगवाए पौधे, बाग में पहुंचते हैं खरीदार; रोल मॉडल बने गुजरात में दोस्त से प्रेरित होकर किसान ने 12 साल पहले दो बीघा जमीन में अनार के पौधे लगाए। शुरुआत में कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन धीरे-धीरे बागवानी संभल गई और उत्पादन बढ़ने लगा। पूरी खबर पढ़िए