शिवगंज शहर के कॉलेज रोड पर केनरा बैंक के पास एक निजी प्लॉट पर निर्माण कार्य के नाम पर सालों पुराने विशालकाय नीम के पेड़ काट दिए गए। लगभग तीन वर्षों से खड़े इन हरे-भरे पेड़ों को आरी और कटर मशीन से धराशायी कर दिया गया। इस घटना की जानकारी मिलने पर आसपास के लोगों में नाराजगी देखी गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई और अवैध निर्माण का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार विभागों की ओर से समय पर सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे मामलों को बढ़ावा मिल रहा है। सूचना मिलने पर तहसीलदार आसुराम, आरआई और पटवारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मौका फर्द तैयार कर घटना से संबंधित जानकारी जुटाई। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई थी। शहरवासियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और अधिक पौधारोपण के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर शिवगंज में निर्माण कार्यों की आड़ में हरे-भरे वृक्षों की कटाई जारी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना अनुमति पेड़ काटने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शहर की हरियाली को बचाया जा सके। शिवगंज तहसीलदार आसुराम ने बताया कि यह मामला नगर पालिका क्षेत्र का होने के कारण नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) को इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। शिवगंज में अवैध बोरवेल खुदाई जारी, नियमों की अनदेखी शिवगंज शहर के न्यू नेहरू नगर गली नंबर-1 में बिना किसी स्वीकृति के बोरवेल खुदाई का मामला सामने आया है। स्थानीय प्रशासन, नगरपालिका और जलदाय विभाग को इसकी सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे क्षेत्र में अवैध बोरवेल खुदाई धड़ल्ले से जारी है। राजस्थान सरकार भू-जल संरक्षण के लिए सख्त नियम लागू कर रही है। राजस्थान भू-जल (संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण विधेयक 2024 के तहत बिना अनुमति बोरवेल खोदना दंडनीय अपराध है। नियमों के अनुसार, बोरवेल या ट्यूबवेल की खुदाई से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य है। नियमों के पहले उल्लंघन पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा नियम तोड़ने पर 6 माह तक की जेल और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। अवैध खुदाई पर रोक लगाने के लिए ड्रिलिंग मशीनों का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य किया गया है। इन सख्त नियमों के बावजूद शिवगंज में जिम्मेदार विभाग 'देखो और जाने दो' की नीति पर चलते दिख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो शहर में भू-जल स्तर पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्षेत्रवासियों ने अवैध बोरवेल खुदाई तुरंत रुकवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में शिवगंज तहसीलदार आसु राम राणा ने बताया कि बोरवेल की खुदाई उनके क्षेत्राधिकार से बाहर और नगर पालिका क्षेत्र में हुई है। उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई के लिए अधिशासी अधिकारी (ईओ) को सूचित कर दिया है।