जयपुर के निविक हॉस्पिटल के डॉक्टर सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जिसमें हॉस्पिटल प्रशासन की गंभीर लापरवाही देखने को मिली है। उनकी भर्ती पर्ची पर किसी भी डॉक्टर के साइन नहीं हैं। वहीं इमरजेंसी केस में आए आरोपी मरीज को सीनियर डॉक्टर की बिना कंसल्टेंसी के सीधे जनरल मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर दिया। लीगल केस होने पर बिना प्रोटोकॉल के तहत भर्ती करने पर मेडिसिन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने नाराजगी जताई है। बता दें कि निविक हॉस्पिटल के डॉक्टर सोमदेव बंसल को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। उसी दिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉ. सोमदेव बंसल पर मरीजों के डॉक्यूमेंट में कांटछांट कर RGHS वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप हैं। वहीं उनकी गिरफ्तारी के विरोध में प्रदेश के सभी निजी अस्पताल मंगलवार को बंद हैं। सीनियर डॉक्टर का कहना है कि मरीज की प्रारंभिक जांच के आधार पर उसे किस विभाग में भर्ती करना है। यह सीनियर डॉक्टर ही तय करता है। इस मामले में एक रेजीडेंट ने भर्ती कर जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया। यह नियम के खिलाफ है। वहीं मामले में हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी भी चुप्पी साधे हैं। मेडिकल बोर्ड का किया गठन SMS हॉस्पिटल प्रशासन ने मेडिकल लीगल केस होने के कारण मरीज की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। इसमें कार्डियक, न्यूरोलॉजी, जनरल मेडिसिन और फोरेंसिक मेडिसिन के डॉक्टर शामिल हैं। हालांकि 24 घंटे से ज्यादा समय होने के बाद भी मरीज की जांचें पूरी नहीं हो सकी है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट आई सामान्य जनरल मेडिसिन की यूनिट-9 में भर्ती डॉ. सोमदेव बंसल की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट नॉर्मल आई है। इसमें ब्लड रूटिन जांच के अलावा ईसीजी और सिटी स्कैन कराई गई है। यह सभी रिपोर्ट सामान्य आई है। वहीं अब बोर्ड ने अन्य जांचें भी करवाई हैं, जिसकी रिपोर्ट आना बाकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे निर्णय लिया जाएगा। भर्ती पर्ची में रेजीडेंट-सीनियर डॉक्टर के साइन नहीं
डॉक्टर सोमदेव बंसल के भर्ती मामले में हॉस्पिटल प्रशासन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है। मेडिसिन डिपार्टमेंट की तरफ से लिखे पत्र के मुताबिक न तो भर्ती पर्ची पर किसी रेजीडेंट डॉक्टर ने साइन किए और न ही किसी सीनियर डॉक्टर की कंसल्टेंसी ली गई। आरोपियों के लिए दूसरा जेल बना एसएमएस अस्पताल किसी न किसी अपराध में जेल जाने वाले आरोपियों के लिए सवाई मानसिंह हॉस्पिटल दूसरा जेल बन गया है। यहां जेल से बचने के लिए आरोपी मरीज (रसूखात वाले) बीमारी का बहाना बनाकर SMS अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। 1 लाख रुपए की रिश्वत मामले में भी डॉ. मनीष अग्रवाल के साथ ऐसा ही हुआ था। जेल जाने के बाद डॉ. अग्रवाल ने भी तबीयत खराब होने की बात कही और एसएमएस अस्पताल में 2 दिन भर्ती हो गए। बाद में जांच में तमाम रिपोर्ट नॉर्मल मिली, तब उन्हें हॉस्पिटल प्रशासन ने वापस छुट्टी करके जेल भेजा। पूरे प्रदेश में डॉक्टर की गिरफ्तारी के खिलाफ चल रहा प्रदर्शन निविक हॉस्पिटल में सितंबर-2025 में इलाज के दौरान एक महिला मरीज की मौत हो गई थी। मामले में एडवोकेट जितेंद्र शर्मा ने मां के इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। इस पर मानसरोवर थाना पुलिस ने आरोपी डॉ. सोमदेव बंसल (45) को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि मरीजों के डॉक्यूमेंट में कांटछांट कर हॉस्पिटल संचालक ने RGHS वेबसाइट पर अपलोड किए थे। पुलिस के अनुसार- जांच में सामने आया था कि पेशेंट को बार-बार डिस्चार्ज दिखाकर दोबारा भर्ती दर्शाया गया। साथ ही एक ही कंसेंट फॉर्म में काटछांट कर अलग-अलग डेट डालकर उपयोग किया गया। आरजीएचएस कार्यालय की जांच में भी अस्पताल के खिलाफ अनियमितताएं प्रमाणित पाई गईं। वहीं हॉस्पिटल संचालक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन राजस्थान के आह्वान पर मंगलवार सुबह 8 बजे से बुधवार सुबह 8 बजे तक निजी अस्पताल बंद हैं। ये है एमएलसी केस में भर्ती का नियम मेडिकल लीगल केस में आए मरीज को भर्ती करने के लिए पुलिस के जवान आरोपी को लेकर हॉस्पिटल पहुंचते हैं। यहां ओपीडी या इमरजेंसी में आने पर किसी सीनियर डॉक्टर को दिखाते हैं। सीनियर डॉक्टर प्रारंभिक जांच और लक्षणों के आधार पर तय करता है कि मरीज को किस विभाग (जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी या अन्य किसी विभाग ) की यूनिट में भर्ती करें। यह खबर भी पढ़ें... निजी हॉस्पिटल निदेशक की गिरफ्तारी के विरोध में उतरे डॉक्टर्स:ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद,प्राइवेट अस्पतालों में 24 घंटे के लिए हड़ताल जयपुर के निविक हॉस्पिटल के निदेशक की गिरफ्तारी के विरोध में मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) (राजस्थान) के आह्वान पर डॉक्टर्स ने विरोध जताया। इसका असर निजी अस्पतालों की ओपीडी सेवाओं पर दिखा। सुबह से जयपुर के तमाम निजी अस्पतालों में डॉक्टर ओपीडी चैंबर में नहीं बैठे और नए मरीजों को नहीं देखा। हालांकि भर्ती (आईपीडी) मरीजों को डॉक्टरों ने संभाला। (पूरी खबर पढ़ें)