बारां जिले के कलौनी निवासी युवा किसान बृजेश चंदेल आधुनिक और एकीकृत खेती से बाकी किसानों के लिए मॉडल बन गए हैं। बृजेश खेतों में अपनी नवाचारी सोच से सालाना 20 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहे हैं। बृजेश बताते हैं कि 2016 में दादा की समझाइश के बाद कोटा में कोचिंग छोड़कर गांव आ गया। दादा चाहते थे कि पुश्तैनी जमीन और विरासत को उनकी मौजूदगी में ही पोता संभाल ले। शुरुआती सालों में पारंपरिक खेती की, लेकिन लागत इतनी आती थी कि कुछ बचत नहीं हो रही थी। तब नवाचार और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने का फैसला किया। साल 2024 में पपीता के 1000 और अंजीर के 600 पौधे लगाए थे, जो प्रतिकूल मौसम के कारण खराब हो गए। निराश होने के बजाय 30 मार्च 2025 में फिर से शुरुआत की है। इस बार नीमच से उच्च गुणवत्ता वाले पपीते के 1000 पौधे मंगवाए और ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाई। अब बगीचे में प्रत्येक पौधे पर 50 किलो से लेकर 1 क्विंटल तक फल लग रहे हैं। अप्रैल 2026 तक वे 2 लाख रुपए की शुद्ध आय कर चुके ​थे। अगस्त तक 1 लाख रुपए की अतिरिक्त आय की उम्मीद है। वहीं, अंजीर में छह माह से फल आने लगे। हालांकि इसका बाजार मिलने की समस्या आई। साथ–साथ बृजेश ने खेत पर तकनीक का समन्वय स्थापित कर दिया है। सरकारी योजनाओं व अनुदान का फायदा उठाते हुए खेती में लागत कम की। नीति आयोग के प्रोजेक्ट के तहत उन्हें फार्म पौंड, 3 किलोवाट सोलर पैनल और स्प्रिंकलर सिस्टम मिला। इससे न केवल बिजली के बिल से छुटकारा मिला, बल्कि बरसात का पानी एकत्र कर भूमिगत जल स्तर में भी सुधार किया। अब मछली पालन शुरू किया है। उन्होंने बताया कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपने फॉर्म को विविध बनाया है। फलों में नींबू, अंजीर और पपीता के बगीचे लगाए। वहीं, फूल में एक एकड़ में गेंदा की खेती कर रहे हैं। खेती के साथ पशुपालन और गोबर गैस प्लांट लगा रखा है। प्याज और लहसुन के सुरक्षित भंडारण के लिए स्वयं का गोदाम है। इनके नवाचार देखने के लिए नीति आयोग के जनरल सेक्रेटरी राजीव ठाकुर और बारां कलेक्टर रोहिताश तोमर आ चुके हैं। भविष्य में बेर, आंवला, बांस और सहजन के बगीचे लगाने, मधुमक्खी पालन शुरू करने की योजना है।