राजस्थानी माटी की सोंधी महक और सूफी संतों की रूहानी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ‘गणगौर- रिदम ऑफ राजस्थान’ म्यूजिकल महफिल 3 मई को शाम 7 से रात 10 बजे तक फतहसागर के पास स्थित विंडहैम ग्रैंड रिसोर्ट में सजेगी। इसमें राजस्थानी लोकधुनों और सूफी संगीत का संगम देखने को मिलेगा। मुख्य गायक धरम सिंह ने बताया कि इस रूहानी शाम में बाईसा रा बीरा..., जलालो बिलालो जैसे लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीतों के साथ बाबा बुल्ले शाह, अमीर खुसरो और संत कबीर की रचनाओं की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। धरम के अलावा श्रेया अग्रवाल (वोकल्स), सारंगी पर ऐजाज हुसैन, ड्रम पर अरुण कांबले, कीबोर्ड पर विपुल गामरे, बेस पर विवेक विश्वकर्मा, तालवाद्य (पर्कशन) पर निब्बन लोखंडे और 4 अन्य सहायक कलाकार भी संगत करेंगे। बनारस घराने से लेकर शेड्स ऑफ मल्हार तक धरम की यात्रा धरम सिंह मूल रूप से चित्तौड़गढ़ में जन्मे, लेकिन पिता के आर्मी में होने के कारण शिक्षा अलग-अलग शहरों में हुई। 2011 में दिल्ली विश्वविद्यालय की द इंडियन म्यूजिक सोसायटी से जुड़कर उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शुरुआत की। उन्होंने बनारस घराने के प्रख्यात पंडित भोलानाथ मिश्रा के मार्गदर्शन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत (ख्याल गायकी) की शिक्षा पाई और उदयपुर में समर्थ जानवे से भी बारीकियां सीखीं। 2020 में सुखाड़िया विश्वविद्यालय से एमए (म्यूजिक) में गोल्ड मेडल हासिल किया। मशहूर ऑडियो प्लेटफॉर्म स्पॉटिफाई पर उनका गीत शेड्स ऑफ मल्हार संगीत प्रेमियों के बीच जगह बना चुका है। बता दें कि गीतांजली मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल रहेंगे की मेडिकल पार्टनरशिप में होने वाले इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक लोक संगीत को पुनर्जीवित करना है।