राजस्थान की पहलवान सोनिया चौधरी के आंसू से भी नहीं पसीज रहे हैं राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारी। पिछले दो साल से वह स्पोर्ट्स काउंसिल के बाबुओं के पास चक्कर लगा रही है। रो-रो कर अपना दुखड़ा बता रही है, लेकिन असली मेडल का सर्टिफिकेट होने के बाद भी उसका नाम आउट अॉफ टर्न नौकरी की लिस्ट में शामिल नहीं किया जा रहा है, जबकि जयपुर में हुई उसी नेशनल कुश्ती चैम्पियनशिप के कई पहलवान रेलवे सहित अन्य विभागों में नौकरी पा चुके हैं। राजस्थान के कई पदक विजेता पहलवान इन दिनों आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी के विवाद में फंस गए हैं। फर्जी और असली राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को लेकर उठे सवालों ने खिलाड़ियों के करियर पर अनिश्चितता के बादल खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले कई पहलवानों की नियुक्ति प्रक्रिया अटक गई है। राष्ट्रीय पदक, नौकरी और विवाद... 2 अलग-अलग राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं मेरी क्या गलती है, मुझे क्यों नौकरी से वंचित रखा जा रहा मैंने जयपुर में नेशनल कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य जीता था। चैम्पियनशिप भारतीय ओलिंपिक संघ की ओर से गठित एडहॉक कमेटी ने करवाई। खेल मंत्रालय से मान्यता थी। मंत्रालय-आईओए मान चुके हैं कि चैम्पियनशिप वैध थी, फिर भी स्पोर्ट्स काउंसिल मुझे दो साल से आउट ऑफ टर्न नौकरी से वंचित रख रहा है। -सोनिया चौधरी, पहलवान, राजस्थान