श्रीगंगानगर जिले के रामसिंहपुर की रहने वाली सुखदेव कौर (75) का बेटा 7 साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में डंकी रूट से विदेश चला गया था। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। 10 जून को इटली की राजधानी रोम में हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। उसके शव को 22 दिन बीत जाने के बावजूद भारत नहीं लाया जा सका। आर्थिक तंगी के कारण मां अब भी अपने बेटे के अंतिम दर्शन के लिए तरस रही है। साल 2009 में पति मीत सिंह के निधन के बाद सुखदेव कौर दोनों बेटों के सहारे जीवन बसर कर रही थीं। 2019 में बड़ा बेटा सुखवंत सिंह ने विदेश जाने का फैसला लिया। परिवार ने बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं माना। पिछले सात सालों में सुखवंत कई देशों में भटकता रहा और आखिरकार इटली पहुंच गया। छोटे भाई बबलू ने बताया- 10 जून को रोम में सुखवंत सिंह को हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई। महज 18 दिन बाद यानी 28 जून को उसे इटली की नागरिकता मिलने वाली थी, लेकिन मौत ने सब कुछ छीन लिया। अब 22 दिन से सुखवंत का शव रोम के एक अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ है। शव भारत लाने में लाखों रुपए का खर्च आएगा, जो इस गरीब परिवार के बस की बात नहीं है। बबलू ने बताया- भाई ने जो कुछ कमाया, वह इटली की नागरिकता की प्रक्रिया में ही खर्च हो गया। घर बनाने के लिए थोड़े पैसे भेजे थे, बस। भाई की मौत का सदमा इतना गहरा था कि बबलू करीब 20 दिन तक घर से बाहर नहीं निकला। अब राशन खत्म होने पर मां सुखदेव कौर फिर दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हो गई हैं। परिवार के पास न तो इतने पैसे हैं और न ही सरकारी मदद या प्रक्रिया की पूरी जानकारी। सुखदेव कौर का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी बस यही एक इच्छा बाकी है कि बेटे का शव जल्द से जल्द घर पहुंचे, ताकि वह अंतिम बार उसे देख सके और पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सके। परिवार ने इसके लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी गुहार लगाई है।