जिले के बॉर्डर इलाकों में लगातार बड़ी बरामदगियों के बावजूद ड्रोन से हेरोइन तस्करी थम नहीं रही है। पिछले कुछ समय में 5 बड़ी कार्रवाइयों में 31.677 किलो से हेरोइन पकड़ी जा चुकी है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 158 करोड़ रुपए के करीब बैठती है। इसके बावजूद जिस तरह ड्रोन गतिविधियां जारी हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि पकड़ी जा रही खेप संभवतया तस्करी का केवल छोटा हिस्सा हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियां भी मान रही हैं कि यह केवल ड्रग तस्करी का मामला नहीं बल्कि सीमा पार से संचालित संगठित नेटवर्क की गतिविधि है, जिसे सुरक्षा चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।पिछले 72 घंटे में श्रीकरणपुर क्षेत्र में 3 कार्रवाइयों में 15.997 किलो हेरोइन बरामद हुई। 5 अप्रैल की रात 23 ओ गांव की रोही में 12.167 किलो हेरोइन पकड़ी गई थी। 6 अप्रैल को 2.340 किलो हेरोइन और और 7 अप्रैल को 1.490 किलो हेरोइन जब्त हुई है। पिछले तीन वर्षों में श्रीकरणपुर क्षेत्र में ड्रोन से नशा तस्करी की यह 18वीं घटना है। वहीं, रावला क्षेत्र में जनवरी में 4.880 किलो तथा 26 मार्च को 10.800 किलो हेरोइन जब्त की गई। इन मामलों में अब तक 10 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एक साथ कई खेप भेजने की रणनीति सूत्रों के अनुसार तस्कर एक साथ कई ड्रोन भेजने की रणनीति अपनाते हैं ताकि एक खेप पकड़े जाने की स्थिति में दूसरी खेप सुरक्षित पहुंच सके। लगातार हो रही बरामदगी भी इस ओर संकेत कर रही है कि इस सेक्टर को सक्रिय एंट्री रूट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीकरणपुर क्यों बना तस्करों की पसंद: जांच में सामने आया है कि पंजाब से नजदीकी इस क्षेत्र को तस्करों के लिए लॉजिस्टिक रूप से अनुकूल बनाती है। मुख्य नेटवर्क पंजाब से जुड़ा होने के कारण यहां लोकल हैंडलर आसानी से मिल जाते हैं और जरूरत पड़ने पर अस्थायी ठिकाने भी मिल जाते हैं। नॉलेज; पंजाब में डबल लेयर की सुरक्षा: पंजाब में होमगार्ड अभी भी बॉर्डर पर बीएसएफ की मदद करते हैं। जबकि अपने यहां पर बॉर्डर होमगार्ड सीमा पर ड्यूटी नहीं कर रहे। इसके साथ ही पंजाब में एंटी ड्रोन तकनीक भी बीएसएफ के पास है जो यहां नहीं है। इसलिए पंजाब में डबल लेयर सुरक्षा है। वहां पर सख्ती के चलते ही यहां तस्करी बढ़ी है। एसपी ने कहा- बॉर्डर से लगते इलाकों में सख्ती बढ़़ाई है एसपी हरीशंकर ने कहा, ड्रोन तस्करी में जो पिक्चर में आ रहे हैं, उन्हें अंदर कर रहे हैं। हमारा फोकस तस्करी से जुड़े संगठित अपराध पर काबू पाना है। पकड़े गए कई अपराधी अब से पहले तीन से पांच बार तक माल पार करा चुके हैं पर अब सख्ती बढ़ा दी है। मैं खुद भी अभी बॉर्डर एरिया में ही हूं। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर आरके अरोड़ा का कहना है कि ड्रोन तस्करी हमारे यहां ज्यादा होती है। कुछ बॉर्डर ​एरिया के पीछे की सड़कों की कनेक्टिविटी का फायदा भी पंजाब के तस्कर उठाते हैं। हमारी एजेंसियों के ​लिए एंटी ड्रोन तकनीक सबसे बड़ा चैलेंज बना हुआ है। जरूरत है सबसे हाइएस्ट तकनीक देने की। जैसलमेर की साइड में तस्करी कम होने का कारण है कि ड्रोन की भी एक सीमा होती है। वहां दूरी अ​धिक है।