वाहनों की फिटनेस में हो रहे फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। करीब पांच साल से अटकी ऑटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) योजना अब लागू हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश में वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह तकनीकी और पारदर्शी प्रक्रिया से की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत अब आरटीओ कार्यालयों में होने वाली पारंपरिक फिटनेस जांच बंद कर दी गई है। राज्य सरकार की पॉलिसी के अनुसार संचालित पुराने फिटनेस सेंटरों को भी बंद कर दिया गया है। अब सभी वाहनों की फिटनेस जांच केवल ऑटोमैटेड टेस्टिंग स्टेशनों पर ही अनिवार्य रूप से होगी। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में एक साथ 10 ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन्स (एटीएस) शुरू किए गए हैं। इनमें अजमेर, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, सीकर, जयपुर, शाहपुरा, कोटा और नोहर जैसे शहर शामिल हैं। इन केंद्रों पर आधुनिक मशीनों और सेंसर आधारित तकनीक से वाहनों की जांच की जाएगी। पहले आरटीओ और पारंपरिक फिटनेस केंद्रों पर जांच के दौरान अनियमितताओं और फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में बिना वाहन पेश किए ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते थे। अब नई प्रणाली में ब्रेक, सस्पेंशन, प्रदूषण और अन्य तकनीकी मानकों की जांच पूरी तरह ऑटोमैटेड होगी और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड भी की जाएगी। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना नहीं होगी।