भास्कर न्यूज | बारां समाज की व्यवस्थाओं से पीड़ित होकर व्यक्ति कलम उठाता है। यही पीड़ाएं सृजन का आधार बनती हैं। समाज की विसंगतियों से सुधार की उम्मीद पैदा होती है। इसी से कबीर जैसे रचनाकार जन्म लेते हैं। पीड़ित व्यक्ति के हृदय में कवि जन्म लेता है। कवि पीड़ा के निराकरण की दिशा में लिखता है। इससे कविता बनती है। कविता समाज को सही दिशाबोध देती है। यह बात रामावतार सागर ने ओम साहू की तीसरी पुस्तक ‘आजादी के बाद’ के विमोचन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह में भी उन्हीं पीड़ाओं का वर्णन है। इसमें समाज की विसंगतियों पर चोट और समाधान के प्रयास भी दिए गए हैं। साहित्य रसिक समिति सारस ने ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह का विमोचन समारोह आयोजित किया। जिसकी अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने की। मुख्य अतिथि राजकीय महाविद्यालय कोटा के हिंदी विभाग के आचार्य रामावतार सागर थे। विशिष्ट अतिथि साहित्य भारती के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश जलजला, अभिभाषक परिषद अध्यक्ष ओम भारद्वाज थे। संचालन श्याम अंकुर ने किया। समारोह की शुरूआत पूजा-अर्चना से हुई। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया। नाथूलाल निर्भय ने काव्य वंदना प्रस्तुत की। पुरोधा कवि के रूप में दुष्यंत कुमार की गजल का वाचन बृजभूषण चतुर्वेदी ब्रजेश ने किया। अतिथियों का स्वागत अंकित शर्मा, कृष्णकांत शर्मा, योगेश गुर्जर, राजेश नागर, संपतराम मेहरा ने किया। कृति और कृतिकार का परिचय मयंक सोलंकी ने दिया। उन्होंने बताया कि ‘वक्त के साथ’ और ‘मुझे मत मारो’ के बाद ओम साहू की तीसरी कृति ‘आजादी के बाद’ गजल संग्रह के रूप में आई है। यह कृति राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर की पांडुलिपि प्रकाशन योजना के तहत साहित्यगार जयपुर से प्रकाशित हुई है। साहित्य लिखना और पढ़ना जरूरी जगदीश जलजला ने कहा कि हृदय का हाहाकार कवि के चिंतन पटल पर अंकित होता है। साहित्यिक भाषा में समाज के सामने आता है। समाज को दिशा देता है। मूल्यों को बनाए रखने के लिए साहित्य लिखना जरूरी है। साहित्य पढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि साहित्य में विविध विधाओं को समाहित करने का गुण होता है। ओम भारद्वाज ने कहा कि कवि विविध विषयों पर अपने विचार लेखनी से उठाता है। समाज का मार्गदर्शन करता है। प्रद्युम्न वर्मा ने कहा कि कवि अपनी लेखनी से समाज को दिशाबोध देता है। यह भागीरथी कार्य है। उन्होंने कहा कि व्यंग्यकार ओम साहू की कृति में राष्ट्र वंदना, समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य की भाषा भी मिलेगी। इसके बाद काव्य गोष्ठी हुई। शिव जोशी वरुणेश, हरि अग्रवाल, भैरवलाल भास्कर, मयंक सोलंकी, बद्रीलाल दिव्य, शकुंतला कुंतल, पीयूष परिंदा, सोनू सुरीला, नाथूलाल निर्भय, अश्विनी त्रिपाठी ने काव्य पाठ किया। समारोह में कोटा और बारां के साहित्यकार, साहू परिवार के सदस्य, मंगलम विहार के लोग आदि मौजूद थे।