सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने पूर्व जजों को देश की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनके अनुभव, ज्ञान और न्यायिक विवेक का राष्ट्र निर्माण, एडीआर, लोक अदालतों और कानूनी जागरूकता अभियानों में सक्रिय उपयोग होना चाहिए। सीजेआई शनिवार को रालसा की ओर से पूर्व जजों की भूमिका पर आयोजित ‘द बेंच बियोंड रिटायरमेंट’ कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दिया कुमारी भी मौजूद थीं। सीजेआई ने राजस्थान की बावड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बावड़ियों में बारिश का पानी सहेजा जाता है और संकट में यही लोगों की प्यास बुझाती हैं। हमारे बुजुर्ग और पूर्व अनुभवी जज भी समाज की ऐसी ही बावड़ियां हैं। जब न्याय व्यवस्था किसी संकट, जटिल विवाद या मार्गदर्शन की स्थिति में होती है, तब हमें इन्हीं अनुभवी लोगों की ओर देखना चाहिए। इसलिए पूर्व जजों को सहेजकर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज देश की जनता का न्यायपालिका पर गहरा विश्वास है। हमारे एक-एक शब्द को लोग पूजनीय मानते हैं। इसलिए न्यायपालिका और उससे जुड़ी संस्थाओं को ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत है। न्यायपालिका केवल भवनों या आदेशों का नाम नहीं, बल्कि आम आदमी की उम्मीद का आधार है। जब किसी व्यक्ति के पास कुछ नहीं होता, तब भी उसके झोले में संविधान होता है और वही उसके अधिकारों की सबसे बड़ी ताकत है। हाईकोर्ट के एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा ने कहा कि अदालतों में मुकदमों की भरमार से न्याय मिलने में देरी हो रही है। जज की यात्रा रिटायरमेंट के बाद खत्म नहीं होती। पूर्व जज न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस दौरान सीजेआई ने हाईकोर्ट में यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम की शुरुआत की। रालसा के मल्टी यूटिलिटी वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि पूर्व जज समाज को नई दिशा दे रहे हैं। युवा जजों को उनसे सीखना चाहिए। आमजन सीधे कोर्ट जाने से पहले लोक अदालत का दरवाजा जरूर खटखटाएं। दुष्यंत की पंक्तियों से समझाया न्याय ‘वो आदमी नहीं है, मुकम्मल बयान है, माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है। सामान कुछ नहीं है, फटे-हाल है मगर, झोले में उसके पास कोई संविधान है। उस सरफिरे को यूं नहीं बहला सकेंगे आप, वो आदमी नया है, मगर सावधान है।’