सुप्रीम कोर्ट ने कोटा में चंबल किनारे स्थित घड़ियाल सेंचुरी के 732 हेक्टेयर एरिया को डी-नोटिफाई (सेंचुरी से मुक्त) करने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। यह रोक जज विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर चंबल नदी में अवैध खनन मामले की सुनवाई करते हुए लगाई है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा- अवैध बजरी खनन के कारण लुप्त हो रहे घड़ियालों को अपना आवास छोड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि जहां मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हाल ही में घड़ियाल छोड़े थे, वहां भी अवैध खनन शुरू हो गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि माफियाओं के पास पुलिस से बेहतर हथियार हैं। कोर्ट ने कहा कि अवैध खनन के वीडियो वास्तव में डरावने हैं। नदियों से रेत निकालने के लिए भारी मशीनें लगी हैं। रोज एक हजार से ज्यादा ट्रक पुलिस थानों और चौकियों के सामने से गुजरते हैं। राजस्थान में खनन माफियाओं ने कई एसडीएम, पुलिस अधिकारियों और वन अधिकारियों की हत्या तक कर दी है। सरकारें खुद को असमर्थ बताकर माफिया को खुली छूट दे रही हैं। ये खनन माफिया अब चंबल के नए डकैत बन चुके हैं। अधिकारियों को फटकार लगाकर कहा कि वे रासुका जैसे कानून भूल चुके हैं। जैसलमेर जैसे कानून लगाने होंगे। कोर्ट ने भारतीय वन्यजीव बोर्ड को इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई (11 मई) तक रोक लगाई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर 2025 को इस पूरे क्षेत्र को सेंचुरी से मुक्त करने की अधिसूचना जारी की थी। पट्टों पर रोक
सालों पुराने मकानों पर लोगों को जो मालिकाना हक मिलने वाला था, वह अटक गया। निवर्तमान पार्षद जितेंद्र सिंह का कहना है कि शिविर लगाने वाले थे, इससे पहले ही रोक लग गई। लोन मिलने में दिक्कत बैंकों से होम लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि तकनीकी रूप से यह जमीन वन विभाग के अधीन ही मानी जाएगी। निर्माण कार्य पर सख्ती सकतपुरा, किशोरपुरा, शिवपुरा, नयागांव जैसे इलाकों में हो रहे नए निर्माणों पर वन विभाग फिर से सख्ती कर सकता है। बजरी की किल्लत बढ़ेगी चंबल में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्ती के बाद शहर में बजरी की किल्लत बढ़ सकती है। 40 हजार परिवारों पर असर कोटा बैराज से हैगिंग ब्रिज तक का एरिया डी-नोटिफाइड किया था। इसमें 206 खसरे शामिल थे। किशोरपुरा का 208.56 हैक्टेयर, शिवपुरा का 320.33 हैक्टेयर, सकतपुरा का 186.36 हैक्टेयर, रामपुरा का 0.7 हैक्टेयर, गुमानपुरा का 3.93 हैक्टेयर और नयागांव का 12.12 हैक्टेयर एरिया शामिल था। करीब 40 हजार से अधिक मकान हैं। डेढ़ लाख आबादी रहती है। इस एरिया को 41 साल पहले चंबल घड़ियाल सेंचुरी में शामिल किया था। कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने कहा हमें पूर्ण विश्वास है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय सभी तथ्यों, वैज्ञानिक अध्ययनों और क्षेत्रीय वास्तविकताओं का समुचित परीक्षण कर इस विषय में न्यायसंगत और संतुलित निर्णय देगा। कोटा के नागरिक न्यायालय में पूर्ण आस्था रखते हुए अपने पक्ष को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते रहेंगे। सीसीएफ कोटा,सुगनाराम जाट कोर्ट से स्टे मिलने की जानकारी मिली है। पूरा लिखित आदेश आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगा कि आगे की प्रक्रिया क्या रहेगी।