बाड़मेर इस बार भीषण अकाल की चपेट में है। 4 दिन तक सक्रिय रहा मानसून अब विदा हो चुका है। ऐसे में अब इस महीने के अंत तक बारिश की संभावना ही नहीं है। किसान दुखी हैं। दो दिन पूर्व जिले के कुछ गांवों में हल्की बारिश हुई थी। इसके बाद मानसून कमजोर हुआ। फिर विदा हो गया। ऐसे में किसानों की उम्मीद टूट गई है। अब किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। अब तो तेज धूप खिलने लगी है। तापमान बढ़कर 39.2 डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसे में 5 डिग्री से ज्यादा तापमान बढ़ गया है। जिले में इस बार बारिश के आंकड़े बेहद निराशाजनक रहे हैं। अब तक पूरे जिले में महज 250 एमएम औसत बारिश ही दर्ज की गई है। यह खरीफ की फसलों के लिए बिल्कुल नाकाफी है। पूरे सीजन में औसत बारिश 387 एमएम रहती है। दो दिन पहले जिले के कुछ गांवों में हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई थी। इससे एक बार फिर उम्मीद जगी थी। उसके तुरंत बाद मानसून कमजोर पड़ गया। फिर विदाई ले ली। किसानों को एक बार अच्छी बारिश का इंतजार मानसून की इस बेरुखी का सबसे बड़ा खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में खड़ी बाजरे सहित अन्य फसलें अब आखिरी बारिश मांग रही थीं। पानी के अभाव में वे सूखने लगी हैं। किसान बेबस हैं। वे अपनी महीनों की मेहनत और पूंजी को आंखों के सामने जलते हुए देखने को मजबूर हैं। आसमान में बादलों की जगह अब चिलचिलाती धूप छा गई है। पशुधन के लिए चारे का संकट है।