अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक नंबर-2 में बंद डकैत जगन गुर्जर की हत्या पूरी प्लानिंग के तहत की गई। पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी विष्णु लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहा था। भास्कर की जांच में पता चला कि बैरक में लगा सीसीटीवी कैमरा खराब नहीं था, बल्कि उसकी रिकॉर्डिंग धुंधली करने के लिए उस पर टूथपेस्ट लगाया गया था। कैमरे पर मिट्टी भी डाली गई थी, ताकि घटनाक्रम रिकॉर्ड नहीं हो सके। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मल्टीलेयर सुरक्षा व्यवस्था वाली हाई सिक्योरिटी जेल में कैमरों की निगरानी कैसे नहीं हो सकी। जेल के कंट्रोल रूम में सभी कैमरों के लाइव विजुअल उपलब्ध रहते हैं और किसी भी कैमरे में गड़बड़ी आने पर तत्काल जानकारी मिल जाती है। जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ का कहना है कि विष्णु ने बेहद शातिराना तरीके से अपना इरादा छिपाए रखा। सेल के बाहर लगे कैमरों के फुटेज में दोनों बंदी सामान्य और मित्रवत व्यवहार करते दिखाई दे रहे थे। वहीं, जगन हत्याकांड की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। बेटे आशाराम ने धौलपुर के बाड़ी थाने के एसएचओ पर फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। तीन मिनट में थमी जगन की सांसें; गले की हड्डी-भोजन की नली टूटी पोस्टमार्टम रिपोर्ट... डकैत जगन गुर्जर की मौत गले और गर्दन पर गंभीर दबाव पड़ने से हुई। छह सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की ओर से किए गए पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में सामने आया कि अत्यधिक दबाव से उसकी गर्दन की हड्डी (हायोड बोन) टूट गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गर्दन के बीच वाले हिस्से में अंदरूनी रक्तस्राव (हेमरेज) मिला। श्वासनली (ट्रेकिया) और भोजन नली (इसोफेगस) के आसपास भी गंभीर चोट के संकेत मिले हैं। गर्दन की महत्वपूर्ण हड्डी और आसपास के ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा था। प्रारंभिक मेडिकल निष्कर्षों के अनुसार घटना के बाद 3 मिनट में उसकी सांसें थम गईं। हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की मौत कितनी देर में होगी, यह चोट की प्रकृति, दबाव की तीव्रता और उसकी शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। अंतिम राय एफएसएल और हिस्टोपैथोलॉजी की रिपोर्ट मिलने के बाद दी जाएगी। जगन के नाखूनों के नमूने सुरक्षित कर एफएसएल भेजे गए हैं। भाई पप्पू को अन्य जेल भेजेंगे; परिवार को सुरक्षा मिलेगी... 5 मांगों पर सहमति... जगन गुर्जर की हत्या के बाद मंगलवार को उसके परिजन और गुर्जर समाज के लोगों ने जेएलएन अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर धरना दिया। सुबह करीब 8:30 बजे जगन के बेटे आशाराम के नेतृत्व में शुरू हुआ धरना करीब 11 घंटे बाद प्रशासन से पांच मांगों पर सहमति बनने के बाद समाप्त हुआ। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने की मंजूरी दी। परिजनों की प्रमुख मांग जगन के भाई पप्पू गुर्जर को दूसरी जेल में शिफ्ट करने की थी। इस संबंध में डीजी जेल के नाम आवेदन भेजा गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भरतपुर या धौलपुर जेल में शिफ्ट किया जाएगा। दूसरी मांग परिवार की सुरक्षा को लेकर थी, जिसे प्रशासन ने स्वीकार कर लिया। बेटे आशाराम को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है। वहीं परिवार की सुरक्षा के लिए धौलपुर एसपी से भी बात की गई, जिन्होंने सुरक्षा उपलब्ध कराने पर सहमति दी है। तीसरी प्रमुख मांग मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की थी, जिसे भी स्वीकार कर लिया गया।