राजस्थान के 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलने के लिए सरकार ने बदलाव की तैयारी कर ली है। अब इन केंद्रों के मेंटेनेंस और मरम्मत की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा अभियान (समसा) से हटाकर सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्लूडी) को सौंपने की तैयारी है। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा और जर्जर भवनों की खराब स्थिति को देखते हुए लिया गया है। पिछले साल ही सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब चार हजार आंगनबाड़ी भवन तकनीकी रूप से ’अनसेफ’ माने गए थे। समसा के पास पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञता न होने के कारण इनका मेंटेनेंस लंबे समय से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में अब स्कूली बच्चों और छोटे बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए पीडब्लूडी इस जिम्मेदारी को लेने की तैयारी कर रहा है। मेंटेनेंस का काम रोटेशन से संभव हाल ही में हुई पीडब्लूडी की बैठक में इस बिंदु पर डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने अफसरों से इस जिम्मेदारी को लेकर चर्चा की है। ऐसे में अब विभागीय अफसरों के बीच इसे लेकर एक - दो दिन में अहम बैठक होगी, जिसमें तय होगा कि इस काम को कैसे अंजाम दिया जाएगा। वित्तीय संसाधन की उपयोगिता के अनुसार ये काम रोटेशन के जरिए कराया जा सकता है। उधर जिलावार भी टेंडरिंग आदि हो सकती है। विभाग के पास मेंटेंस का 80 करोड़ है। इसके अलावा डीएमएफटी फंड, एमएलए-एमपी फंड आदि का उपयोग इन आंगनबाड़ी केंद्रों के जीणोद्धार पर होगा। 20 लाख बच्चे पोषण-टीकाकरण के लिए जुड़े इन आंगनबाड़ी केंद्रों से करीब 40 लाख बच्चे और महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें 3 से 6 वर्ष के बच्चे लगभग 15-18 लाख बच्चे प्रारंभिक शिक्षा के लिए पंजीकृत हैं। लगभग 20 लाख बच्चे पोषण और टीकाकरण के लिए जुड़े हैं। इन जिलों में हालात ज्यादा खराब