वित्त विभाग अब राज्य के सभी कर्मचारियों के वेतनमानों में आ रही विसंगतियों सहित अन्य मामलों को दूर करने के लिए उनके मौजूदा वेतनमानों के निर्धारण की फिर से गहन जांच कराएगा। इस संबंध में वित्त (नियम) विभाग ने परिपत्र जारी किया है। सभी विभागों को सितंबर 2026 के वेतन बिलों के साथ वेतन निर्धारण की जांच पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से संलग्न करने के लिए कहा है। इससे राज्य के कर्मचारियों के अधिक या कम वेतन निर्धारण संबंधी विसंगतियां दूर हो सकेंगी। अधिक वेतन से राज्य सरकार को और कम वेतन निर्धारण से कर्मचारियों को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे ही देखते हुए सरकार ने पुन: जांच को कहा है। जांच दल गठित करेंगे परिपत्र में कहा गया है कि प्रत्येक विभाग में कार्यालयाध्यक्ष, वरिष्ठतम लेखाधिकारी तथा स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी/कर्मचारी का संयुक्त जांच दल गठित किया जाए। इसी दल से सभी वेतन निर्धारण प्रकरणों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में कोई त्रुटि या अधिक भुगतान का मामला सामने आता है तो तत्काल संशोधित कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस दिया जाए। अतिरिक्त राशि का भुगतान हो गया है तो उसे तुरंत वसूला जाए। इस प्रकार बनाएंगे चैकलिस्ट, फिर करेंगे जांच वित्त विभाग ने सर्कुलर के साथ एक चैकलिस्ट भी सभी विभागों को बनाकर दी है। उसमें कर्मचारी के नाम से लेकर प्रथम नियुक्ति तिथि, नियुक्ति का प्रकार, पदनाम, सेवा का नाम, प्रोबेशन पीरियड की पूरी जानकारी, इस अवधि के असाधारण अवकाश की जानकारी, इस अवकाश के कारण बढ़ी अवधि की भी जानकारी, सीधी भर्ती से नियुक्त कर्मचारी जो पूर्व में पंचायती राज या स्थानीय निकायों में कार्यरत थे, उनके नियमित वेतन श्रृंखला की जानकारी शामिल है। इसके अलावा प्रथम नियुक्ति तिथि के समय वेतनमान, पेबैंड, सेवाकाल में दंड, निलंबन अवधि, एसीपी, पे-लेवल, पदोन्नति की तिथि या रिक्त रही अवधि की जानकारी, विभागीय जांच या न्यायिक प्रकरण, पूर्व में गलत भुगतान या अधिक भुगतान हो गया हो तो उसकी जानकारी, यदि पदोन्नति का परित्याग किया गया हो या अन्य कोई विवरण जो कर्मचारी संबंधी हो, सूची में शामिल किया जाएगा। अधिकारी की जवाबदेही तय होगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि जांच के बाद भी किसी प्रकार का अनियमित वेतन भुगतान सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त जवाबदेही तय होगी। उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। अधिक भुगतान की वसूली भी उनसे की जाएगी। कर्मचारी को सुनवाई का अवसर यदि किसी केस में अधिक भुगतान या कम भुगतान हुआ है तो ऐसी स्थिति में विभाग संबंधित कर्मचारी या अधिकारी को सुनवाई का पूरा अवसर देगा। इसके बावजूद भी अधिक वेतन भुगतान की स्थिति इस दुबारा जांच के बाद न बनी रहे, विभागीय अधिकारी यह भी सुनिश्चित करेंगे। क्या होगा इसका असर? आदेश के बाद राज्य सरकार के सभी विभागों में कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण की समीक्षा होगी। जिन कर्मचारियों का वेतन नियमों के अनुसार निर्धारित रहा, उनके लिए समस्या नहीं होगी। जिन मामलों में त्रुटि या अधिक भुगतान मिलेगा, वहां नियमों के तहत संशोधन व वसूली की कार्रवाई की जाएगी।