राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की पटवार भर्ती परीक्षा-2021 में डमी कैंडीडेट बैठने का मामला सामने आने के बाद सेंटरों पर एंट्री सिस्टम सवालों के घेरे में है। एसओजी अब तक ऐसे 10 अभ्यर्थियों को पकड़ चुकी है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि बोर्ड ने सेंटर पर एंट्री से पहले 17 लाख अभ्यर्थियों की जांच का काम नई दिल्ली की कम अनुभवी ‘इनोवेटिव्यू कंपनी’ को दे दिया। कंपनी को काम देने के लिए टेंडर की शर्तों में बदलाव तक किया गया। 32 लाख के टेंडर में 5 करोड़ रुपए टर्नओवर की शर्त लगा दी गई। नतीजा, दर्जनों डमी कैंडीडेट परीक्षा में शामिल हो गए और पूरी परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई। फ्रिस्किंग यानी परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की जांच का ठेका लेने वाली फर्म को एडमिट कार्ड चेकिंग, मेटल डिटेक्टर और सुरक्षा से जुड़ा काम करना था। कृषि पर्यवेक्षक और पटवार भर्ती परीक्षा के अलग-अलग टेंडर में दिल्ली की इनोवेटिव्यू, एवीए सिस्टम्स और रोमन नेटवर्क्स प्रालि. शामिल हुईं। इनोवेटिव्यू इंडिया प्रालि. में अंकित अग्रवाल और विशाल मित्तल डायरेक्टर थे। इसके बावजूद विशाल मित्तल ने दूसरी कंपनी का प्रोपराइटर बनकर इसी टेंडर में हिस्सा लिया। कंपनियों ने एक ही समय में एक ही बैंक से डीडी बनवाया। चयन बोर्ड ने कंपनियों के इस पूल सिस्टम को जानबूझकर अनदेखा किया। पटवार भर्ती की अधिसूचना जनवरी 2020 में, परीक्षा से 20 माह पहले जारी हो चुकी थी। इसके बावजूद बोर्ड ने परीक्षा से महज 15 दिन पहले 8 अक्टूबर 2021 को फ्रिस्किंग का टेंडर जारी किया। दोनों बार यह काम परीक्षा से सिर्फ 5 दिन पहले इनोवेटिव्यू कंपनी को मिला। इसके बदले कंपनी को 5.98 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। अब डमी कैंडीडेट पकड़े जाने के बाद केंद्रों की जांच व्यवस्था एसओजी के रडार पर है। सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में इस टेंडर में मिलीभगत मानी गई। बोर्ड ने भी स्वीकार किया कि समय कम होने से फर्म के दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं हो सकी। ऐसे सामने आया कंपनियों का पूल सिस्टम बोर्ड ने कंपनी को यूं पहुंचाया फायदा नोट - इस प्रकरण में इनोवेटिव्यू कंपनी का पक्ष जानने के लिए ईमेल किया गया, लेकिन कंपनी का कोई जवाब नहीं मिला। एक्सप्लेनर- परीक्षा से 5 दिन पहले फर्म के हवाले 5162 केंद्रों की जांच कृषि पर्यवेक्षक और पटवार भर्ती 21 में 5162 केंद्रों पर 17.30 लाख अभ्यर्थियों की जांच का जिम्मा परीक्षा से पांच दिन पहले कंपनी को मिला। इसका फायदा उठाकर गिरोह ने पटवार भर्ती में डमी कैंडीडेट बैठा दिए। हाल ही में एसओजी ने पटवार भर्ती परीक्षा के एक मूल अभ्यर्थी गीतेश व उसकी जगह एग्जाम देने वाले डमी कैंडीडेट नीरज कुमार को गिरफ्तार किया। गीतेश ने पटवारी पद पर नौकरी भी हासिल कर ली। पकड़े जाने पर उसे निलंबित किया गया है। गिरोह तक पहुंचने के लिए एसओजी गीतेश से पूछताछ कर रही है। ठेका लेने वाली कंपनी की 3 लापरवाही बोर्ड प्रबंधन पर सवाल ऐसे मामलों में वार्षिक टेंडर प्रक्रिया हो, ताकि खामियों से बचा जा सके “आरटीटीपी रूल्स के मुताबिक किसी भी टेंडर में प्रतिभागियों को निविदा प्रस्तुत करने के लिए कम से कम 20 दिन का समय मिलना चाहिए। चयन बोर्ड ने दोनों परीक्षाओं में पूरी प्रक्रिया 20 दिन में ही निपटा दी। ऐसी खामियों से बचने के लिए सर्विस से जुड़े मामलों में वार्षिक टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।” भास्कर एक्सपर्ट - कानाराम, टेंडर प्रक्रिया के जानकार “संभवतया कमजोर जांच व्यवस्था के कारण डमी कैंडीडेट्स को एंट्री मिली। फिलहाल हम अपराध से जुड़े मामले को इन्वेस्टिगेट कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की फ्रिस्किंग में गड़बड़ी का इनपुट मिलता है, तो जांच का दायरा बढ़ाएंगे।” -विशाल बंसल, एडीजी एसओजी “ये भर्ती मेरे जॉइन करने से पहले हुई है, इसलिए इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। मेरे जॉइन करने के बाद केंद्रों पर फ्रिस्किंग को काफी सख्त किया है। फेस रीडिंग, लाइव ओटीआर जैसी चीजें जोड़ी हैं।” -आलोक राज, चेयरमैन कर्मचारी चयन बोर्ड “हमने पूरी पारदर्शिता से टेंडर किए। सरकार से बजट देरी से मिलने के कारण एनवक्त पर टेंडर हुए। फ्रिस्किंग का काम करने वाली कंपनियों की संख्या बेहद कम है। ऐसे उपलब्ध संसाधनों से बेहतर काम करवाना होता है।” -हरिप्रसाद शर्मा, तत्कालीन चेयरमैन, कर्मचारी चयन बोर्ड