अलवर| धनतेरस से पहले 1 नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र में खरीदारी और निवेश करना शुभ माना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और जमीन-जायदाद खरीदने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस नक्षत्र में खरीदी गई वस्तु या किया गया निवेश निरंतर वृद्धि करता है। इस बार धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी। पं. यज्ञदत्त शर्मा के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र बताए गए हैं। इनमें पुष्य आठवां नक्षत्र है और इसे नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। जिस दिन पुष्य नक्षत्र के साथ कोई वार आता है, उसी के नाम से उसका योग जाना जाता है। 1 नवंबर को रविवार होने के कारण इसे रवि पुष्य नक्षत्र कहा जाएगा। पौराणिक मान्यताओं में पुष्य नक्षत्र को सिद्धि का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि यदि किसी दिन कोई विशेष शुभ मुहूर्त नहीं हो और उस दिन पुष्य नक्षत्र हो तो वह सिद्ध मुहूर्त बन जाता है। ज्योतिषाचार्य तपेश अवस्थी के अनुसार पुष्य नक्षत्र को शक्तिशाली और कल्याणकारी माना गया है। इसके देवता गुरु और स्वामी शनि हैं। गुरु को भाग्य, बुद्धि, ज्ञान, धर्म और समृद्धि का कारक माना जाता है, जबकि शनि कर्मफल और न्याय से जुड़े हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु की शुभता और शनि के स्थायित्व के संयोग से इस नक्षत्र में शुरू किए गए कार्य लंबे समय तक फल देते हैं।