पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्रांच के आईजी कालूराम रावत ड्यूटी से साढ़े तीन माह से ‘गायब’ हैं। तैनाती के बाद उन्होंने यहां पर जॉइन ही नहीं किया। रावत ने जनवरी में अपने अधिकारी को एक दिन नहीं आने का मैसेज किया था, जिसके बाद पुलिस मुख्यालय को उनके बारे में कोई खबर नहीं है। उनके बारे में अधिकारियों से कहीं अधिक मातहत पूछताछ कर रहे हैं। अचानक चर्चा बढ़ने के बाद पुलिस मुख्यालय ने उनको रिकॉल नोटिस जारी किया है। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने जॉइन नहीं किया। आईपीएस कालूराम रावत पुलिस मुख्यालय में जुलाई 2025 में डीआईजी पुलिस हाउसिंग के पद पर आए थे। इस पोस्टिंग के दौरान ही उनका प्रमोशन डीआईजी से आईजी के पद पर हुआ। वे 12 जनवरी से कार्यालय नहीं आए। उस दिन उन्होंने अपने बॉस एडीजी (हाउसिंग) भूपेन्द्र साहू को एक मैसेज भेज कर कहा कि बुखार होने के कारण कार्यालय नहीं आ सकूंगा। इसी बीच 23 फरवरी को उनका तबादला आईजी एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पद पर हो गया। वे न पुराने पद से रिलीव होने कार्यालय पहुंचे न ही नए पद पर जॉइन करने। कई दिन निकलने के बाद भी नव पदस्थापन पर नहीं आने पर एडीजी (सिविल राइट व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग) लता मनोज ने डीजीपी आफिस को लिखित में सूचना दी, कहा कि आईजी रावत ने काफी समय निकलने के बाद भी जॉइन नहीं किया, न ही उन्होंने कोई सूचना दी है। इसके बाद कार्मिक शाखा की ओर से कालूराम रावत को रिकॉल नोटिस जारी कर कहा है कि वे उपस्थिति दें अन्यथा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। पहले जब भी गए सूचना दी थी इससे पहले कालूराम रावत जब भी आफिस नहीं आए उसकी सूचना देते थे। वे 9 सितंबर से 24 अक्टूबर को मेडिकल लीव पर रहे। इसके बाद 26 अक्टूबर से 10 नवम्बर तक पीएल पर रहे। तीसरी बार 12 जनवरी को गए, लेकिन इस बार बस एक दिन का मैसेज भेजा था। अब उनसे पुलिस मुख्यालय का सम्पर्क नहीं हुआ। भास्कर ने भी उनसे सम्पर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ मिला। कई जूनियर अफसर भी पड़ताल में जुटे कालूराम रावत के लिए सीनियर्स से कहीं ज्यादा उनके साथ पूर्व में रहे जूनियर्स पड़ताल कर रहे हैं। जब पता चला कि वे कार्यालय नहीं आ रहे हैं, तो उनकी पड़ताल और तेज हो गई। हालांकि कोई यह नहीं बोल रहा कि उन्हें आईजी से क्या काम है? आईजी (मानवाधिकार) पर दुष्कर्म का केस दर्ज आईजी (मानवाधिकार) किशन सहाय के खिलाफ 53 वर्षीय महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। डाक से भेजी गई शिकायत पर यह एफआईआर मालवीय नगर थाने में दर्ज की गई है। मामले की तफ्तीश एडिशनल डीसीपी जिज्ञासा को दी गई है। एफआईआर में महिला ने बताया कि आईपीएस ने शादी का झांसा दिया। सरकारी आवास पर बुलाया और जबरदस्ती की। आरोप है कि उनका मोबाइल बंद कर दिया गया और उनके साथ मारपीट की। शिकायत नहीं करने की धमकी दी। उन्हें तीन माह से वीडियो काल कर धमकाया गया। इसके बाद दूसरे राज्य से डाक से शिकायत भेजी। 29 अप्रैल को एफआईआर दर्ज की गई। इधर, किशन सहाय का कहना है कि मैं 10 साल से वैज्ञानिक दृष्टिकोण व विज्ञानवाद की विचारधारा का प्रचार कर रहा हूं। इसी के खिलाफ यह षड्यंत्र रचा गया है। पुलिस तफ्तीश में सारी चैट निकालकर जांच करेगी तो सारा षड्यंत्र सामने आ जाएगा।