भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा पश्चिमी देशों में जारी युद्ध का असर अब शहर के विकास कार्यों पर भी नजर आने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण निर्माण सामग्री महंगी हो गई है। यूआईटी और नगर निगम के कई सड़क निर्माण कार्य ठप हो गए हैं। इनके वर्क ऑर्डर पहले ही जारी हो चुके हैं। यूआईटी की ओर से गौरव पथ पर सुखाड़िया सर्किल से भदालीखेड़ा तक करीब 4 करोड़ 87 लाख रुपए की लागत से होने वाला री-कार्पेटिंग कार्य फिलहाल रुका हुआ है। इसके अलावा 200 फीट रिंग रोड पर लगभग 6 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित सड़क निर्माण भी अटका पड़ा है। यूआईटी से सुखाड़िया सर्किल तक करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत वाला प्रस्तावित सड़क निर्माण भी रुका हुआ है। इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में रेलवे स्टेशन से कोर्ट चौराहा, एसके प्लाजा से मिर्ची मंडी, 100 फीट रोड पर डामरीकरण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए यूआईटी कॉन्ट्रेक्टर एसोसिएशन ने सचिव को पत्र लिखकर राहत देने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष चांदमल सोमानी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों की कमी है। बाजार में अनिश्चितता भी है। गिट्टी, सीमेंट, अन्य निर्माण सामग्री के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कीमतें निर्धारित सीमा से कहीं अधिक हो चुकी हैं। इनमें रोजाना वृद्धि हो रही है। इससे ठेकेदारों के लिए पुराने दरों पर काम करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कार्यों की गति प्रभावित हो रही है। कई प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं। कॉन्ट्रेक्टर की मुख्य मांगें समय सीमा में विस्तार- एसोसिएशन ने मांग की है कि जिस तरह कोरोना काल में निर्माण कार्यों की समय सीमा बढ़ाई गई थी, वैसी ही शिथिलता वर्तमान आपदा को देखते हुए भी बरती जाए। यूआईटी स्तर पर अतिरिक्त समय दिया जाए। छोटे कार्यों के लिए विशेष सहयोग- 50 लाख रुपए से कम लागत वाले, तीन महीने से कम समय सीमा वाले कार्यों में रेट एस्केलेशन (दर वृद्धि समायोजन) का प्रावधान नहीं होता है। इससे ठेकेदारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। धारा 32 का उपयोग- ऐसे कार्यों को या तो अनुबंध की धारा 32 के तहत वापस लिया जाए या फिर विशेष सहयोग देकर पूर्ण करवाया जाए। इससे संवेदकों के हितों की रक्षा हो सके। ^राज्य सरकार के स्तर का मामला है। संगठन ने सीएमओ को भी पत्र भेजा है। वहां से जैसा निर्देश प्राप्त होगा, उसी अनुसार, आगे की कार्यवाही होगी। - ललित गोयल, सचिव