राजस्थान के 41 जिलों के 53 हजार गांवों को रोज एक घंटा पानी सुनिश्चित करने, सप्लाई को निर्बाध चलाने को लेकर नई संशोधित नीति लाई जा रही है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों की सारी पेयजल योजनाओं को इस नीति के तहत ही संचालित किया जाएगा। हर घर को बाहर से पानी लाने की बजाय सीधे नल से पानी सुनिश्चित करने को नीति बनाने पर काम हो रहा है। इसके तहत उपलब्ध जल का घर घर तक संधारण, प्रसारण रोजाना कैसे हो, इस पर फोकस है। इसके तहत करीब 95 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को शुद्ध नल का जल सप्लाई सुनिश्चित करने का प्रस्ताव है। सीएस ने पेयजल योजनाओं के संचालन एवं संधारण की व्यापक नीति को शीघ्र अंतिम रूप देने के लिए अफसरों को कहा है। इधर, प्रदेश के 95 लाख घरों तक नल का जल पहुंचाने के लिए नई नीति को 3 विभाग अंतिम रूप देंगे। इनमें पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, जलदाय विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को मिलकर फाइनल करना है। तीनों के समन्वय से संशोधित नीति को आगे बढ़ाने पर सीएस का फोकस है। 25 लाख आदिवासी परिवारों को पानी का अलग प्लान प्रदेश के करीब 25 आदिवासी परिवारों को घर घर पानी को लेकर सीएस अलग प्लान बनवा रहे हैं। उन्होंने जनजाति विकास मंत्रालय से लेकर जलदाय विभाग को मिलकर अलग प्लान बनाने को कहा है। ग्रामीण परिवार होने के बावजूद आदिवासी बेल्ट की भौगोलिक परिस्थितियां अलग होने और नल कनेक्शन में आ रही परेशानियों को दूर करने का प्लान बन रहा है। 100 करोड़ से बड़ी योजना को खुद सीएस देखेंगे राजस्थान में 970 करोड़ रुपए का जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाला होने के बाद अब राजस्थान की जेजेएम की 100 करोड़ रुपए या इससे अधिक लागत की योजनाओं पर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास सीधे नजर रखेंगे। सीएस ने अफसरों से 100 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं की नियमित मानिटरिंग करने को कहा। सीएस ने जेजेएम अफसरों से हर घर जल कनेक्शन के प्रमाणित डेटा मांगे। कितने घरों के कनेक्शन जांच के बाद प्रमाणित हुए कि पानी पहुंच रहा है, इसकी रिपोर्ट मांगी है।