स्मार्ट सिटी के तहत शहर में पर्यटकों-महिलाओं के लिए 6 साल पहले 3 करोड़ रुपए खर्च कर लगाए गए 50 स्मार्ट टॉयलेट अब बदहाल हैं। अधिकारियों की अनदेखी से स्मार्ट टॉयलेट अब कबाड़ हो चुके हैं। इन पर लगे नल और टंकियां चोरी हो गईं। दरवाजे भी टूट गए हैं। अब तालों में बंद हैं। हैरत की बात है कि निगम ने स्मार्ट टॉयलेट की मेंटेनेंस के लिए प्राइवेट कंपनी को जिम्मेदारी दी। पांच साल में कंपनी को करीब 91 लाख रुपए भुगतान किया। इसके बावजूद मेंटेनेंस नहीं होने से ये टॉयलेट कबाड़ हो गए। टॉयलेट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होनी थी, लेकिन यह सिस्टम भी निगम के अधिकारियों ने बंद कर दिया। सुलभ शौचालय की तरह मैन्युअल व्यवस्था कर दी। सांगानेरी गेट अस्पताल के पास, हवामहल के सामने, जलमहल, चांदी की टकसाल, जवाहर सर्किल, चांदपोल बाजार, जलेबी चौक, आमेर, त्रिपोलिया व बापू बाजार, जंतर-मंतर सहित अन्य जगह स्मार्ट टॉयलेट लगाए थे। एक टॉयलेट पर ~6 लाख खर्च; कई टॉयलेट ऐसी जगह बनाए, जहां जरूरत ही नहीं थी स्मार्ट सिटी की स्मार्ट टॉयलेट बनाने की योजना अप्रैल 2018 में शुरू हुई। इसके तहत 50 ई-टॉयलेट 3 करोड़ रु. की लागत से बनाए गए थे। टॉयलेट के उपयोग के लिए लोगों से 10 रुपए तक चार्ज लिया जाता था। बॉक्स में एक रुपए का सिक्का डालने के बाद गेट का लॉक ऑटोमेटिक खुल जाता था। एक टॉयलेट पर करीब 6 लाख रुपए खर्च हुए थे। शहर में कई टॉयलेट ऐसी जगह बना दिए गए, जहां इनका उपयोग नाममात्र हुआ। मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी के अफसरों ने एप्टिसा कंपनी को दी। कंपनी ने भुगतान तो उठा लिया, लेकिन देखरेख नहीं की। इस कारण कुछ असामाजिक तत्व ई-टॉयलेट के सिक्के वाला बॉक्स, लाइट और नल तक उखाड़ ले गए। कई टॉयलेट के गेट के लॉक टूट गए। पानी की टंकियां भी गायब हो गईं। एसई ने कहा- एक साल बाद ही निगम को हैंडओवर कर दिए थे “स्मार्ट टॉयलेट लगने के एक साल बाद निगम को हैंडओवर कर दिया था। अब निगम अधिकारियों को ही टॉयलेट का मेंटेनेंस और रख-रखाव करना है। इसके लिए फंड भी ट्रांसफर किया गया था।” - दिनेश गोयल, एसई, स्मार्ट सिटी