मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सफाई को लेकर 2 सप्ताह पहले ही अफसरों को खरी-खरी सुनाई थी। उन्होंने विधायकों के फीडबैक के आधार पर 657 जगह बने कचरा डिपो हटाने को कहा था। लेकिन, सरकार ने जनता से समस्याएं मांगी तो सामने आया कि 657 नहीं, 12077 जगह कचरे के ढेर लगे हैं। जयपुर में 754 सहित 309 शहरों में औसतन 50 से अधिक कचरा डिपो बने हुए हैं और शहर सड़ रहे हैं। पूरे भारत में स्वच्छता सर्वेक्षण के नतीजे जुलाई में आने वाले हैं। सीएम और यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा का फोकस इस बार शहरों को सफाई में चमकाने और अच्छी रैंकिंग प्राप्त करने का रहा। उन्होंने पूरे साल अफसरों को सफाई में शहरों को बेहतर बनाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, हकीकत जनता ने बता दी। सरकार की ही रिपोर्ट के अनुसार 11 हजार कचरे के ढेर तो प्रदेश के जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर सहित 19 बड़े शहरों में लगे हैं। इस तरह बड़े शहरों में औसतन 600 जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है। हालांकि स्वायत्त शासन सचिव रवि जैन की सख्त मानिटरिंग के कारण दावा किया जा रहा है कि 12077 में से 11613 जगह से कचरा हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। करीब 700 जगह कचरा ज्यादा जमा है, उसे भी हटा दिया जाएगा। 7 हजार से ज्यादा मेनहोल खुले सरकारी रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 किलोमीटर लंबाई में सीवर लाइन खराब दिखी, जिसे रिपेयर कराया जा रहा है। खुली नालियों के मेनहोल करीब 7335 खुले थे, जिनको फेरो सीमेंट कवर से ढका जा रहा है। बड़ी सीवर के मेनहोल कवर भी 815 जगह खुले हैं, जिनको कवर लगाकर ढका जा रहा है। 1356 नए सीवर कनेक्शन दिए शहरों में ऐसी कालोनियों को चयनित किया गया, जो सीवर लाइन से जुड़ी हुई नहीं हैं। कॉलोनियों और लोगों को 1356 नए सीवर के कनेक्शन पिछले 10 दिन में दिए गए। एक लाख 52 हजार 47 प्रमुख चौराहों, डिवाइडरों का खराब हाल था, उनको ठीक कराया गया।