करीब एक सप्ताह से कचरे के ढेर और ठप सफाई व्यवस्था से जूझ रहे जयपुरवासियों को बुधवार देर रात राहत मिली। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ और राज्य सरकार के बीच वार्ता सफल रहने के बाद सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। सरकार ने वाल्मीकि समाज की प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए 25 जुलाई तक सफाई कर्मियों की भर्ती का विज्ञापन जारी करने का आश्वासन दिया। समझौते के तुरंत बाद परकोटा समेत कई इलाकों में नाइट स्वीपिंग शुरू कर दी गई, जबकि इसका व्यापक असर गुरुवार से दिखाई देगा। वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी और नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा की मौजूदगी में हुई वार्ता के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया के नेतृत्व में हुई बैठक में भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने सहित वाल्मीकि समाज की अधिकांश मांगों पर सहमति बनी। इसके बाद यूनियन पदाधिकारियों ने सभी सफाई कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। हड़ताल के दौरान शहर के प्रमुख बाजारों, कॉलोनियों, वार्डों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए थे। घर-घर कचरा संग्रहण प्रभावित रहा और कई स्थानों पर सामुदायिक कचरापात्र समय पर खाली नहीं हो सके। बरसात के बीच फैली गंदगी को लेकर लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही थी। आज से विशेष सफाई अभियान समझौते के बाद नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने अधिकारियों को गुरुवार सुबह से विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। पहले उन इलाकों से कचरा उठाया जाएगा, जहां हड़ताल के दौरान सबसे अधिक गंदगी जमा हुई। इसके लिए अतिरिक्त हूपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर लगाए जाएंगे। आठ साल से दफ्तरों में बैठे 2 हजार सफाई कर्मी अब वार्डों में झाड़ू लगाएंगे कमिश्नर के निर्देश- सफाई कर्मचारी के पद पर भर्ती हुए कर्मचारियों को कार्यालयों, शाखाओं और वीआईपी अटैचमेंट से हटाकर फील्ड में लगाओ नगर निगम में सफाई व्यवस्था की सबसे बड़ी विसंगति दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। सफाई कर्मचारी के पद पर भर्ती होने के बावजूद 8 साल से दफ्तरों, शाखाओं, जोन कार्यालयों और वीआईपी अटैचमेंट में लगे करीब 2000 कर्मचारियों को अब वार्डों में सफाई कार्य करना होगा। निगम कमिश्नर ओम कसेरा ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी सफाई के पद पर भर्ती हुए हैं, उनसे उसी पद के अनुरूप काम लिया जाए। आदेश में कहा गया है कि जोन क्षेत्र में तैनात सफाई कर्मचारी यदि सफाई के अतिरिक्त अन्य कार्य कर रहा है तो उसे तत्काल प्रभाव से वार्ड में भेजा जाए। राजस्व, गार्डन, प्रोजेक्ट, फायर, विजिलेंस सहित अन्य शाखाओं में लगे सफाई कर्मचारियों को भी कार्यमुक्त करने के लिए कार्मिक शाखा को निर्देश दिए गए हैं। निगम प्रशासन का दावा है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब कार्यालयों और अटैचमेंट में लगे सफाई कर्मियों को व्यवस्थित रूप से फील्ड में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। 2 बड़े असर वार्डों में मैनपावर बढ़ेगी ग्रेटर में 1250 और हेरिटेज में 750 कर्मचारी फील्ड में नहीं जयपुर नगर निगम में वर्तमान में 8,200 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 6,200 कर्मचारी वाल्मीकि समाज से और करीब 2,000 अन्य समाजों से हैं। निगम रिकॉर्ड के अनुसार ग्रेटर में करीब 1,250 और हेरिटेज में करीब 750 ऐसे कर्मचारी हैं, जो सफाई कर्मचारी के रूप में भर्ती होने के बावजूद नियमित रूप से फील्ड में सफाई कार्य नहीं कर रहे। इनमें कई कर्मचारी शाखाओं, कार्यालयों, जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों और अफसरों के बंगलों पर अटैचमेंट में लगे बताए जा रहे हैं। वाल्मीकि समाज के संगठन लंबे समय से इस व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप था कि सफाई का पूरा भार एक वर्ग विशेष के कर्मचारियों पर डाल दिया गया, जबकि समान पद पर भर्ती अन्य कर्मचारियों को कार्यालयी या हल्के कार्यों में लगा दिया गया। हाल में सफाई भर्ती को लेकर चले आंदोलन और सामाजिक संगठनों की बैठकों में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। कई वार्डों में पार्षद लगातार शिकायत कर रहे थे कि स्वीकृत संख्या के मुकाबले मौके पर सफाईकर्मी कम मिलते हैं। दूसरी ओर निगम मुख्यालय और जोन कार्यालयों में सफाई कर्मचारी लिपिकीय, सहायक या अन्य गैर-सफाई कार्यों में लगे हुए थे।