जब पूरा प्रदेश सीवरेज, गंदगी और सरकारी दावों के खोखलेपन से जूझ रहा है, तब कोलायत के ग्रामीणों ने यह साबित किया कि सामूहिक इच्छाशक्ति से बिना सरकारी बजट के भी बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। मानसून के पानी का ऐसा सदुपयोग ही गांवों को आत्मनिर्भर बनाएगा। रविवार को पूर्व कोलायत प्रधान जयवीर सिंह भाटी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने 50 से अधिक ट्रैक्टरों की मदद से 484 बीघा की विशाल ओरण भूमि पर लगातार 10 घंटे श्रमदान कर सेवण और धामन घास का सामूहिक बीजारोपण किया। सनातन परंपरा में प्रकृति और गोवंश को सर्वोपरि मानते हुए कोलायत क्षेत्र में सामूहिक जनभागीदारी का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। आमतौर पर गोचर और ओरण भूमि को मानसून के भरोसे खाली छोड़ दिया जाता है, जिससे वहां अच्छी घास नहीं उगती। लेकिन बीकानेर से 60 किमी दूर प्रसिद्ध सियाणा भैरव मंदिर के ‘शीशा भैरव ओरण’ की कायाकल्प के लिए ग्रामीणों ने मिसाल पेश की है। पूर्व प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि शीशा भैरव मंदिर परिसर में बनी ऐतिहासिक तलाई पिछले दो दशकों से अपने मूल स्वरूप को खो चुकी थी। ओरण भूमि पर अतिक्रमण, पानी की किल्लत और कंटीली झाड़ियों के कारण गोवंश के लिए संकट खड़ा हो गया था। मंदिर समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने बिना किसी सरकारी सहायता के इस पूरी भूमि के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। पहले चरण में ऐतिहासिक तलाई को ठीक करवाया गया और अब घास की बुआई की गई है ताकि सालभर गोवंश को हरा चारा मिल सके। अब ओरण की तारबंदी कराने और ट्यूबवेल लगवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ओरण और गोचर बचाने के लिए सेवण जरुरी
ओरण व गोचर भूमि को कब्जे से मुक्त रखने तथा विचरण करने वाले पशुओं को सालभर हरा व प्राकृतिक चारा मुहैया करवाने के लिए शीशा भैरव एक मॉडल हो सकता है। जहां बिना सरकारी सहायता के ग्रामीणों ने पशुओं के लिए सेवण और धामन घास की बुआई कर दी। जयवीर सिंह भाटी ने बताया कि पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने बहुत साल पहले ही ओरण और गोचर को बचाने के लिए सेवण घास की सलाह दी थी। सरकार को भी इसके लिए योजना बनानी चाहिए जिससे प्रत्येक गांव में पशुओं कि भूमि सुरक्षित रह सके। गोचर बचाने के लिए ‘शीशा भैरव’ बना मॉडल
ओरण व गोचर भूमि को कब्जों से मुक्त रखने और बेसहारा पशुओं को सालभर प्राकृतिक चारा मुहैया करवाने के लिए यह अभियान पूरे जिले के लिए एक मॉडल बन सकता है। जयवीर सिंह भाटी ने बताया कि पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने वर्षों पहले ओरण-गोचर को बचाने के लिए सेवण घास उगाने की मुहिम शुरू की थी। सरकार को भी ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए ताकि हर गांव में पशुओं की चरागाह भूमि सुरक्षित रह सके। गो भक्ति और प्रकृति प्रेम किया एकजुट
पूर्व प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि 484 बीघा की पथरीली भूमि पर सेवण लगाना बेहद मुश्किल था। इसके लिए भोलासर, अक्कासर, हाड़ला, कोलायत सहित आसपास के गांवों में संदेश भिजवाया गया। गो-भक्ति और प्रकृति प्रेम के संकल्प के साथ रविवार सुबह 50 से ज्यादा ट्रैक्टर और दर्जनों ग्रामीण ओरण में पहुंच गए। भीषण धूप और उमस के बावजूद ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा और 10 घंटे में पूरा काम निपटा दिया। श्रमदान के दौरान मंगेज सिंह, शिव सिंह, मोहन सिंह, रणपाल सिंह, रघुवीर सिंह, सांग सिंह, गज्जे सिंह, नरपत सिंह, रामदयाल, शिवलाल, बजरंग सियाग, दिलीप सिंह, पाबू सिंह, खींवसिंह, कालूसिंह, तोलाराम, जीतू राठी, मोहनराम और खेताराम सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।