राजस्थान-गुजरात बॉर्डर से चौंकाने वाली खबर...। बांसवाड़ा और गुजरात के दाहोद को जोड़ने वाले एनएच 56 पर ढाबों पर नामी सीमेंट कंपनियों के टैंकरों से रोजाना भारी मात्रा में सीमेंट चुराई जा रही है। इन ढाबों पर रोजाना 100 से 150 टैंकर रुकते हैं और हर में से 40 से 150 कट्टे (50-50 किलो) सीमेंट चोरी की जाती है। ढाबों के पास 100 से 1000 मीटर पर राजस्थान व गुजरात पुलिस के नाके हैं, इसके बावजूद चोरी जारी है। ये सीमेंट उन्हीं कंपनियों के लेबल वाले खाली कट्टों में भरी जाती है फिर झालोद (दाहोद) की ओर भेज दिया जाता है। बता दें कि एक टैंकर में इतनी सीमेंट आती है कि 50-50 किलो के 600 से 1500 कट्टे तैयार हो जाएं। राजस्थान पुलिस नाके से 1 किमी व गुजरात पुलिस नाके से 100 मी. पर हो रही चोरी पहला ढाबा - गुजरात के आखिरी पुलिस नाके से महज 100 मीटर दूर धावड़िया गांव में। यहां टैंकर का ऊपरी ढक्कन खुला है। एक बच्चा टैंकर के ऊपर खड़ा है और कुछ बच्चे टैंकर से निकाली सीमेंट को नीचे कट्टों में भर रहे हैं। दूसरा ढाबा - राजस्थान सीमा के आखिरी पुलिस नाके से महज एक किमी दूर तरकीया गांव में। ढाबे के चारों ओर अपनी जेब से सड़क बना रखी है। टैंकरों की रेलमपेल मची है। एक टैंकर पर चढ़कर दो लोग सीमेंट निकाल रहे हैं। बाकी कतार में हैं। 190 रु. में ड्राइवरों से खरीदते हैं, फिर 290 रु. में बेचते हैं कुछ टैंकर चालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, सीमेंट निंबाहेड़ा से लाते हैं। गुजरात में बड़े-बड़े सरकारी व निजी प्रोजेक्ट के काम चल रहे हैं। सीमेंट वहीं जाती है। ज्यादातर वडोदरा, सूरत, नवसारी में। वहां हर जगह हमारी सेटिंग है। ढाबे वाले हर बैग (कट्टे) पर ड्राइवरों को 170 रुपए देते हैं। बच्चों को हर बैग पर 20 रुपए दिए जाते हैं। ज्यादातर बच्चे 12 से 14 साल के हैं। ढाबे वाले ब्रांड के लेबल लगाकर एक कट्टा 290 रुपए में बेचते हैं। रोजाना 100-150 टैंकर तो इन ढाबों पर रुकते ही हैं। इधर, एसपी सुधीर जोशी का कहना है कि मामले की जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।