पोकरासर ग्राम पंचायत आज विकास के मॉडल के रूप में उभर रही है। कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले और कच्चे रास्तों की धूल फांकने वाले इस गांव की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। मनरेगा और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से यहां सुविधाओं का ऐसा जाल बिछा है कि पोकरासर अब पूरे ब्लॉक के लिए मिसाल बन गया है। इलाके में भूजल खारा होने के कारण ग्रामीणों के सामने मीठे पानी की बड़ी चुनौती थी। पंचायत ने मनरेगा के तहत 388 टांके बनाकर इस समस्या का समाधान निकाला है। अब ग्रामीण बारिश के मीठे पानी का संग्रहण कर पा रहे हैं, जिससे न केवल महिलाओं का संघर्ष कम हुआ है, बल्कि पशुधन को भी संजीवनी मिली है। सड़कों के अभाव में जो गांव कभी कटा हुआ महसूस करता था, वहां अब रफ्तार दिखती है। पंचायत ने विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए 25 किमी डामरीकरण सड़कों से राजस्व गांवों और ढाणियों को जोड़ा। 8 नई ग्रेवल सड़कों का निर्माण कर आवागमन सुगम किया। 2 किलोमीटर इंटरलॉकिंग सड़क बनाकर गांव की गलियों को कीचड़ मुक्त किया। 10 नए राजस्व गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल किया। सड़कों के बनने से अब एंबुलेंस और स्कूल बसें सीधे घर तक पहुंच रही हैं। किसान अपनी फसल सीधे मंडी ले जा पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म हुआ है। चौहटन तहसील में पोकरासर का नंबर 1 स्थान पर है। गरीबों को छत मुहैया कराने के मामले में पोकरासर पंचायत ने कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करने में यह पंचायत तहसील में अव्वल रही है। अब पक्के मकान ग्रामीणों के आत्मविश्वास को बढ़ा रहे हैं। पंचायत का लेखा-जोखा जनसंख्या : 6000 साक्षरता दर : 70 % जिला मुख्यालय से दूरी : 50 किमी कनेक्टिविटी : सड़क से जुड़ा है पहचान : पशुपालन और कृषि