भास्कर संवाददाता|टोंक ग्रहों के राजा सूर्यदेव 14 अप्रैल को मेष राशि में आएंगे। इसके साथ ही मलमास (खरमास) समाप्त हो जाएगा और पिछले एक महीने से मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी। यानी विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण और गृह प्रवेश जैसे आयोजन 14 अप्रैल के बाद से फिर शुरू हो सकेंगे। इस सीजन का पहला विवाह मुहूर्त 19 अप्रैल को रहेगा। मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य बाबूलाल शास्त्री ने बताया भगवान सूर्य देव 14 अप्रैल मंगलवार सुबह 9.30 बजे मेष राशि में जिसका स्वामी मंगल अश्विनी नक्षत्र जिसके स्वामी केतू है, में उच्च के होकर प्रवेश करेंगे, इससे मलमास समाप्त होकर शुभ मांगलिक कार्यों विवाह आदि की शुरुआत होगी। मेहंदवास निवासी पंडित मोहनलाल शर्मा के अनुसार जब तक सूर्य मीन राशि में रहता है, तब तक शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। अब 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ ही यह अवधि पूरी हो जाएगी और 16 संस्कार व अन्य शुभ काम किए जा सकेंगे। इस सीजन में शादियों की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त से हो रही है। अबूझ मुहूर्त (जैसे अक्षय तृतीया, बसंत पंचमी और देव प्रबोधिनी एकादशी) में बिना पंचांग देखे विवाह समेत कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। जो लोग नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या वाहन, स्वर्ण आभूषण खरीदना चाहते हैं, उनके लिए 14 अप्रैल से 16 मई के बीच का समय सबसे फलदायी है। पंडितों का कहना है कि शादियों का मौसम 14 अप्रैल से शुरू होकर चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा, लेकिन बीच में कुछ समय के लिए मांगलिक कार्यों पर फिर से विराम लगेगा। क्योंकि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा। इस एक महीने की अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। फिर 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू हो जाएगा। यह 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक चलेगा। मान्यता के अनुसार इस अवधि में भी शुभ कार्य नहीं होंगे। 20 नवंबर के बाद तुलसी विवाह के साथ ही शहनाइयां दोबारा गूंजेंगी। युद्ध के असर के बीच शादी का उत्साह भारी आखातीज पर जिले में करीब 400 शादियां होने जा रही हैं। इसे लेकर वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े व्यापारियों में उत्साह है। हालांकि इस बार इजराइल-ईरान युद्ध के कारण सोने की कीमतों में अस्थिरता, कॉमर्शियल गैस की किल्लत जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन इन सबके बीच शहर के बाजार सकारात्मक ग्राहकी के लिए तैयार हैं। गैस सिलेंडरों की किल्लत का असर खाने के मैन्यू पर पड़ा है। कैटरर्स भी अब लाइव फूड काउंटर्स की संख्या 15 से घटाकर 5 से 7 कर रहे है। मैन्यू में ऐसे व्यंजनों को शामिल किया जा रहा है जिनमें कम गैस की खपत हो।