उदयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी का सातवीं बार बोर्ड बना है। इस जीत में टिकट वितरण से लेकर बूथ स्तर तक की रणनीति और चुनाव प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। भाजपा उदयपुर शहर जिला अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ के नेतृत्व में लड़े चुनाव में पार्टी ने 80 में से 53 वार्डों में जीत दर्ज की। दैनिक भास्कर ने भाजपा की चुनावी रणनीति, टिकट वितरण, बागियों को मनाने से लेकर महापौर और उपमहापौर के चुनाव तक को लेकर जिलाध्यक्ष राठौड़ से बातचीत की। पढ़िए जिला अध्यक्ष से हुई बातचीत में उन्होंने क्या-क्या कहा? सवाल: टिकट वितरण से लेकर उम्मीदवारों के चयन और बोर्ड बनने तक क्या रणनीति रही? राठौड़: जिस दिन से जिलाध्यक्ष बना, मेरा प्रयास रहा कि कार्यकर्ता का सम्मान कैसे हो। हमारी पूंजी हमारा कार्यकर्ता है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी का जिलाध्यक्ष बनने का अवसर मिला। नगर निगम चुनाव की घोषणा के बाद सभी की नजर इस बात पर थी कि टिकट वितरण कैसे होगा और भाजपा की क्या स्थिति रहेगी। हमने 80 वार्डों में दो-दो पर्यवेक्षक भेजे। उन्होंने जमीनी स्तर पर सर्वे किया और श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं को टिकट देने का प्रयास किया। सर्वे के आधार पर 80 वार्डों में टिकट दिए गए। ईमानदारी और निष्ठा के साथ टिकट वितरण हुआ और उसी समय काफी हद तक जीत की तस्वीर साफ हो गई थी। सवाल:जिन वार्डों में पार्टी उम्मीदवार की स्थिति कमजोर की रिपोर्ट आई तो, ऐसा क्या किया जीत गए? राठौड़: टिकट देने के बाद हमने लगातार जमीनी स्तर पर काम किया। नया कार्यकर्ता है तो उसका स्वागत होना चाहिए, लेकिन पुराने कार्यकर्ता का सम्मान भी होना चाहिए, इसका हमने पूरा ध्यान रखा। प्रत्येक वार्ड में चुनाव कार्यालय और प्रभारी लगाए गए। हर शाम प्रभारियों की बैठक होती थी। उनसे फीडबैक लिया जाता था कि कितने लोगों से संपर्क हुआ, कार्यालय खुला या नहीं, वार्ड में क्या स्थिति है और क्या समस्याएं हैं। जिन वार्डों में स्थिति कमजोर होने की बात आई वहां हम लोग गए, सब साथ बैठे और रणनीति बनाई और सब कुछ बदल दिया और वहां भी हमने अच्छे वोटों से जीत दर्ज की। बूथ स्तर पर हमारी 21 कार्यकर्ताओं की टीम थी। इस मजबूत टीम के माध्यम से धीरे-धीरे भाजपा का ग्राफ बढ़ता गया। सवाल: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के रोड शो का चुनाव पर कितना असर रहा? राठौड़: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का धन्यवाद देना चाहता हूं। उनके रोड शो में उदयपुर की जनता ने जिस तरह स्वागत और सम्मान किया, वह अद्वितीय था। हजारों की संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर आए। पूरा माहौल ही बदल गया। भाजपा के पक्ष में सर्वाधिक करीब 66.37 प्रतिशत मतदान उदयपुर में हुआ। हमने एक-एक वोटर के घर जाकर संपर्क किया। मतदान के दिन दो-तीन बजे मुझे चिंता हो रही थी कि वोटिंग कम हो रही है। हमारे कार्यकर्ता एक-एक घर गए और मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लेकर आए। मतदान प्रतिशत बढ़ा और उसका फायदा भाजपा को मिला। सवाल: टिकट घोषणा के बाद कांग्रेस-भाजपा में कई बागी सामने आए थे। आपके यहां बगावत को कैसे नियंत्रित किया? राठौड़: करीब 19 लोगों ने हमारे यहां भी निर्दलीय फॉर्म भरे थे। हमारे वरिष्ठ नेता उनके पास गए और समझाने का प्रयास किया। बड़े परिवार में छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। हमने उन्हें समझाया और उन्होंने भी बात समझी। हम सब कहते हैं कि भाजपा हमारी मां है और उसके प्रति विश्वास रखना चाहिए। तीन-चार लोग अंत तक चुनाव मैदान में रहे, लेकिन बाकी सभी बागियों ने भाजपा के पक्ष में अपने नामांकन वापस ले लिए। सवाल: चुनाव से पहले 80 वार्डों का जो आकलन किया वह चुनाव परिणाम से कितनी मैच हुई? राठौड़: तीन-चार स्तर पर सर्वे हुए थे। सर्वे कार्यकर्ताओं के स्तर पर हुआ। हमारे नेताओं ने भी सर्वे किया। इन सभी सर्वे के आधार पर हमने एक-एक वार्ड का आकलन किया था। जब सभी वरिष्ठ नेता बैठे तो मैंने एक-एक व्यक्ति से परिचय लिया। इसमें कोई बूथ अध्यक्ष रहा था, कोई मंडल अध्यक्ष रहा था और कोई ऐसा कार्यकर्ता था जो पार्टी का पर्चा बांटने का काम करता रहा था। ऐसे कार्यकर्ताओं की जानकारी भी हमारे लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे जमीनी स्थिति को सबसे बेहतर जानते हैं। सवाल: पारस सिंघवी के महापौर बनने को आप किस नजर से देखते हैं? राठौड़: मैं इस बात का गर्व से उल्लेख करता हूं कि पारस सिंघवी एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में आगे बढ़े हैं। मेरे साथ जिला महामंत्री भी रहे। कई बार उन्हें मंच मिला या नहीं मिला, कुर्सी कौन लगाएगा, माइक ठीक है या नहीं, मंच की व्यवस्था कैसी है-ऐसे काम भी उन्होंने कार्यकर्ता के रूप में किए हैं। कोरोना महामारी के समय भी हमने उनकी सेवा देखी। उस कठिन समय में अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने श्मशान घाट पर सेवा की और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में भी भूमिका निभाई। रात के समय भी वह उदयपुर की सड़कों पर ट्रैक सूट पहनकर स्कूटर से घूमते और जनता की सेवा करते दिखाई देते थे। आज उनकी सेवा का फल उन्हें मिला है। पारस सिंघवी के नेतृत्व में पांच बार पार्षद रहे कार्यकर्ता को महापौर की जिम्मेदारी मिली है। सवाल: पारस की जीत की घोषणा के बाद आपका एक भावुक वीडियो भी सामने आया। उस समय आपके मन में क्या चल रहा था? राठौड़: वह मेरे लिए भावुक क्षण था। जिस व्यक्ति के साथ मैंने काम किया, मैंने उसे भूखा-प्यासा देखा है। कई बार तबीयत ठीक नहीं होने के बावजूद बिना खाना खाए, बिना पानी पीए दिन-रात लोगों के बीच सेवा करते देखा है। जब ऐसा साथी आगे बढ़ता है और नगर का प्रथम नागरिक बनता है तो खुशी होना स्वाभाविक है। पिछले करीब डेढ़ साल से जिलाध्यक्ष के नाते मैंने भी लगातार मेहनत की। उस समय जो आंसू आए, वे खुशी के आंसू थे। एक सहयोगी, एक कार्यकर्ता जब नगर का प्रथम नागरिक बनता है तो उसकी खुशी अलग होती है।