उदयपुर अपनी साफ हवा और खूबसूरती के लिए देशभर में जानी जाती है। लेकिन दीपावली पर आतिशबाजी का जोश अब शहर की आबोहवा पर भारी पड़ने लगा है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पिछले 5 साल के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों का सीधा और तुलनात्मक गणित समझें तो पिछले दो सालों में ही दीपावली के दिन उदयपुर की हवा में जहर 17.1 प्रतिशत तक बढ़ गया है। साल 2023 की तुलना साल 2025 से करें तो स्थिति साफ हो जाती है। साल 2023 में दीपावली के दिन शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 193 दर्ज किया गया था। यह साल 2024 में बढ़कर 211 पर पहुंचा और 2025 में 226 के स्तर को छू गया। यानी महज दो साल के भीतर हवा की गुणवत्ता में सीधे 33 अंकों की गिरावट आई है। सिर्फ 2024 से 2025 के बीच ही 15 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई। ये तीनों साल बताते हैं कि त्योहार की रात शहर की हवा लगातार खराब श्रेणी में बनी हुई है। पांच साल के आंकड़ों में सबसे बड़ा सबक अगर पिछले 5 सालों (2021 से 2025) के आंकड़ों की तुलना करें तो एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। साल 2021 में उदयपुर ने सबसे खतरनाक प्रदूषण झेला था। तब दीपावली से पहले एक्यूआई 148 था, जो त्योहार के दिन सीधे 315 पर पहुंच गया और बाद में भी 273 रहा। लेकिन इसके अगले दो साल शहर के लोगों ने जागरूकता दिखाई। साल 2022 में दीपावली से पहले एक्यूआई 116, त्योहार के दिन 194 और बाद में घटकर 109 रह गया। साल 2023 में तो दीपावली से पहले हवा सबसे साफ 88 एक्यूआई पर थी, जो त्योहार के दिन 193 और बाद में 152 रही। साल 2023 के बाद यह ग्राफ फिर से बिगड़ने लगा। साल 2024 में दीपावली से पहले एक्यूआई 137, त्योहार के दिन 211 और बाद में 135 दर्ज हुआ। वहीं साल 2025 में त्योहार से पहले यह 119 था, जो दीपावली पर 226 और उसके बाद 161 रहा। त्योहार बीतने के बाद भी आसमान में अटका रहा धुआं प्रदूषण नियंत्रण मंडल की क्षेत्रीय प्रयोगशाला उदयपुर की इस रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू दीपावली के बाद की स्थिति है। आम तौर पर पटाखे छूटने के एक-दो दिन बाद हवा सामान्य होने लगती है, लेकिन 2025 में ऐसा नहीं हुआ। साल 2023 में दीपावली के बाद एक्यूआई 152 और 2024 में घटकर 135 हो गया था। लेकिन 2025 में त्योहार बीतने के बाद भी यह 161 पर अटका रहा। इसका सीधा मतलब है कि पटाखों का धुआं कई दिनों तक शहर की हवा में घुला रहा। अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर इस बार खास नजर बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस बार राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 1 नवंबर से 8 नवंबर तक विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। शहर के पांच प्रमुख स्थानों क्षेत्रीय कार्यालय, टाउनहॉल, सेटेलाइट हॉस्पिटल, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और ईएसआईसी हॉस्पिटल पर हवा में पीएम 10, पीएम 2.5, एसओ 2 और एनओएक्स जैसे जहरीले कणों की जांच की जाएगी। इसके अलावा अशोक नगर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज और हिरण मगरी सेक्टर-6 के सेटेलाइट अस्पताल में भी हवा के मानकों की निगरानी हो रही है। शाम 6 से रात 12 बजे तक नापा जाएगा पटाखों का शोर हवा के साथ-साथ इस बार पटाखों के शोर यानी ध्वनि प्रदूषण की भी सख्त जांच होगी। इसके लिए सूरजपोल गेट, एमबी हॉस्पिटल और अंबामाता क्षेत्र को चुना गया है। इन तीनों जगहों पर शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक लगातार 6 घंटे शोर के स्तर को रिकॉर्ड किया जाएगा। इस पूरे अभियान से यह साफ हो जाएगा कि इस बार दीपावली की आतिशबाजी ने उदयपुर की शांत और साफ आबोहवा को कितना बदला है।