मैं उदयपुर हूं…
आज (19 अप्रैल) मैं अपना 474वां स्थापना दिवस मना रहा हूं। कितना सुंदर संयोग है कि आज ही अक्षय तृतीया भी है।
अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा मैं सिर्फ झीलों, महलों और हवेलियों का समूह नहीं, बल्कि सदियों की संवेदनाओं, दूरदर्शिता और मानवीय सोच का भी जीवंत उदाहरण हूं।
कोई मुझे 'झीलों का शहर' तो कोई 'रोमांटिक सिटी' भी कहता है। मुझे 'पूर्व का वेनिस' कहलाने का भी सौभाग्य प्राप्त है।
कहते हैं एक बंजारे की प्यास से मेरी पहचान बनी। कुछ लोग तो मुझे रेगिस्तानी प्रदेश के बीच पानी का स्वर्ग रचने वाला शहर भी कहते हैं। आज मैं आपको अपने बारे में विस्तार से बताऊंगा। पढ़िए.. मेरी कहानी, मेरी जुबानी.... पर्यटकों की पसंदीदा जगह
टूरिस्ट्स मुझे (उदयपुर) बहुत पसंद करते हैं। यह बात मैं नहीं कह रहा हूं, आंकड़े गवाही दे रहे हैं। मेरे लिए साल 2025 काफी अच्छा रहा था। 2025 के 12 महीनों में कुल 21 लाख 57 हजार 787 टूरिस्ट मेरा दीदार करने पहुंचे। इनमें 19 लाख 96 हजार 700 देसी और 1 लाख 61 हजार 87 विदेशी टूरिस्ट्स थे। 2018 से 2025 के बीच मेरे पास आने वाले टूरिस्ट लगभग डबल हो गए हैं। सर्वश्रेष्ठ शहरों में शामिल
2023 और जुलाई 2024 में खूबसूरती और हेरिटेज की वजह से मुझे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शहरों में दूसरा स्थान मिला था। एशिया में मैं पहने नंबर पर रहा था। ट्रैवल प्लस लीजर मैग्जीन के रीडर्स चॉयस अवॉर्ड के तहत ये रैंकिंग दी गई थी। जुलाई 2024 में मैग्जीन ने अमेरिका में 125 कैटेगरी में वर्ल्ड बेस्ट अवॉर्ड घोषित किए थे। टॉप 10 शहरों में मैक्सिको का सैन मिगुएल डी ऑलेंडे पहला और जापान का क्योटो तीसरे नंबर पर रहा था। मुझे दूसरा स्थान मिला था। उदयपुर भारत महाद्वीप का सबसे 'रोमांटिक' स्थान
इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण ‘जुगनू’ बताते हैं- कर्नल जेम्स टॉड 1818-1822 के बीच उदयपुर में रहे थे। इतिहास के पन्नों को पलटें तो कर्नल जेम्स टॉड का नाम सुनहरे अक्षरों में आता है। 1818 में जब टॉड बीमार हालत में उदयपुर आए, तो उन्हें नगर में प्रवेश के मुहूर्त का इंतजार करना पड़ा। उसी इंतजार के बीच उन्होंने 'आहड़ सभ्यता' को दुनिया के नक्शे पर ला खड़ा किया।
उन्होंने अपनी किताब 'Annals and Antiquities of Rajasthan' में लिखा- उदयपुर भारत महाद्वीप का सबसे 'रोमांटिक' स्थान है।
यह महज तारीफ नहीं थी, बल्कि एक वैश्विक मुहर थी, जिसकी बदौलत जुलाई 2024 में 'ट्रेवल प्लस लीजर' ने इसे दुनिया का दूसरा सबसे खूबसूरत शहर मुझे चुना। साधु ने कहा- मेरी हामी के बिना नहीं बनेगी पाल
महाराणा उदय सिंह ने पानी जमा करने के लिए उदयसागर झील बनवाई। दो बार पाल (किनारे की दीवार) टूट गई। फिर एक नाथ साधु ने कहा- मेरी हामी के बिना पाल नहीं बनेगी। साधु को डबोक के पास धुणीमाता स्थान पर विराजमान किया गया। उसके बाद पाल बनी। आज तक एक दरार नहीं आई। पानी व्यर्थ न जाए, इसके लिए उदयसागर का निर्माण करवाया गया था। 'पिच्छू' बंजारे की प्यास और साधु की 'हामी'
मेरी खूबसूरती सिर्फ महलों में नहीं, झीलों की कहानियों में बसी है। पिछोला झील किसी राजा ने नहीं, बल्कि 1362 ईस्वी में 'पिच्छू' नाम के एक बंजारे ने अपने मवेशियों की प्यास बुझाने के लिए शुरू की थी। वह अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए इस क्षेत्र में आता था। जब उसने पानी की कमी देखी तो स्थानीय लोगों की मदद से एक छोटा सा तालाब खुदवाया। समय के साथ यह तालाब झील का रूप लेने लगा। वर्षों बाद महाराणा लाखा ने इस झील की सुंदरता और उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार करवाया। बाद में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने झील की सुंदरता से प्रभावित होकर इसे और विकसित किया। एक साधारण इंसान की वो छोटी सी कोशिश आज दुनिया की सबसे शानदार झील है। फतेहसागर झील… भारी बारिश में बांध टूटा था
फतेहसागर एक सुंदर नाशपती फल के आकार की कृत्रिम झील है। इस झील का निर्माण साल 1688 में उदयपुर के महाराणा जय सिंह ने कराया था। यहीं पर एक बांध भी बनाया गया था। इसकी नींव इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के बेटे कनॉट के ड्यूक ने रखी थी। इसके बाद 1888 में आई भीषण बारिश की वजह से यह झील और इस पर बना बांध टूटकर बिखर गया था। तब उदयपुर के महाराणा फतेह सिंह ने इस झील पर बने बांध का दोबारा निर्माण करवाया। तब महाराणा फतेह सिंह के नाम पर ही झील का नाम रखा गया। इस झील पर बने एक टापू को नेहरू उद्यान के रूप में विकसित किया गया है। पगड़ी की लाज- जहां शहजादे को मिली शरण
मेवाड़ की माटी ने हमेशा रिश्तों को ऊंचा रखा है। प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं- 1622 में जब शहजादा खुर्रम (शाहजहां) ने अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया, तो महाराणा करण सिंह ने उसे जगमंदिर में शरण दी। दोनों ने अपनी 'पगड़ियां' बदलकर भाईचारा निभाया। आज के दौर में जहां रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं, उदयपुर की ये 'ऐतिहासिक पगड़ी' त्याग और समर्पण की रक्षा की मिसाल है। सस्टेनेबल प्लानिंग- दुश्मन भी ठिठक जाए
कर्नल जेम्स टॉड ने मुझे (उदयपुर) 'स्मार्ट सिटी' का प्राचीन उदाहरण बताया था। यहां की झीलें (पिछोला, फतेहसागर और उदयसागर) सिर्फ पानी का स्रोत नहीं थीं, बल्कि एक 'वाटर-डिफेंस नेटवर्क' थीं। दुश्मन की सेना को रोकने के लिए पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की यह दूरदर्शिता महाराणा उदयसिंह की देन थी, जिन्होंने पहाड़ियों के बीच कम खर्च में विशाल बांध बनवाए। कवि की पीड़ा और प्रताप का गौरव
पिछोला के किनारे बैठकर ही जयशंकर प्रसाद ने अपनी प्रसिद्ध कविता 'पेशोला की प्रतिध्वनि' लिखी थी। उन्होंने लहरों की गूंज में महाराणा प्रताप के उस तेज को ढूंढा, जो आज भी हर उदयपुरवासी की रगों में दौड़ता है। कवियों की रचनाओं ने भी मान बढ़ाया
मेरे लिए कवियों की कई रचनाएं हैं। किसी ने गजल तो किसी ने दोहे लिखे। इसी कड़ी में मारवाड़ी कवि बांकीदास ने लिखा- सांई करे परेवड़ा, जगपद रहे दरबार, पिछोले पानी पीवा और चुगो चुगे कोठार। मतलब कि जगत सिंह के दरबार में कोठार का चुगा चुगेंगे और पिछोला का पानी पीएंगे। उन्होंने लिखा- अगर अगला जन्म मिला, तो कबूतर बनकर भी उदयपुर में ही रहूंगा। अंत में...
मैं सिर्फ पत्थर और पानी का शहर नहीं हूं। एक 'अहसास' हूं। एक बंजारे की मेहनत, एक साधु का आशीर्वाद और महाराणाओं के त्याग का संगम हूं। आज जब आप सेल्फी लेकर मेरी खूबसूरती को कैद करते हैं, तो याद रखिएगा कि इस खूबसूरती के पीछे 474 साल का वो संघर्ष है, जिसने रेगिस्तान के आंचल में झीलों के मोती पिरो दिए। इतिहासकार कहते हैं- सुंदर शहरों में शुमार है उदयपुर
इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं- महाराणा उदय सिंह के समय पहाड़ियों के बीच तालाब बनाए गए। उदयपुर को खूबसूरत शहर बनाने की सोच महाराणा उदय सिंह की ‘मानव-मंदिर-जल’ पर आधारित रही। आज भी उदयपुर विश्व के सुंदर शहरों में शुमार है। ------------- ये खबरें भी पढ़िए… उदयपुर में नया रिकॉर्ड, जनवरी में 2.44 लाख टूरिस्ट आए, शोर और ट्रैफिक जाम ने बढ़ाई विदेशी मेहमानों की चिंता पर्यटन सिटी उदयपुर में देसी-विदेशी टूरिस्ट का आवगमन लगातार बना हुआ है। साल 2026 की शुरुआत शहर के लिए पर्यटन के लिहाज से काफी सुखद रही है। पर्यटन विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने जनवरी में ही उदयपुर में 2 लाख 44 हजार 558 टूरिस्ट घूमने पहुंचे। (पूरी खबर पढ़ें) उदयपुर में 8 सालों में टूरिज्म का ट्रेंड बदला, 2018 के मुकाबले 2025 में डबल हुए पर्यटक, घरेलु टूरिस्ट बने गेम चेंजर उदयपुर की टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए साल 2025 काफी अच्छा रहा है। 2025 के 12 महीनों में कुल 21 लाख 57 हजार 787 टूरिस्ट लेकसिटी के अलग-अलग टूरिस्ट पॉइंट्स पर घूमने पहुंचे। (पूरी खबर पढ़ें)