ईरान-इजराइल युद्ध से उदयपुर का हैंडीक्राफ्ट बिजनेस भी प्रभावित हुआ। व्यापारियों का दावा है कि इसका असर लंबा चलने वाला है। पहले अमेरिकी टैरिफ और रूस-यूक्रेन युद्ध की मार झेल चुके थे, अब इस नए युद्ध ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। उदयपुर से गल्फ देशों को जाने वाले ऑर्डर अटक गए। डिमांड घटने और भाड़ा बढ़ने के कारण करोड़ों का नुकसान हो रहा है। काम नहीं होने से फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। वहीं, उदयपुर घूमने आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी कमी आई है। इस कारण लोकल बाजार का बिजनेस भी प्रभावित हो रहा है। एक्सपोर्ट और टूरिस्ट शॉपिंग दोनों मिलाकर करीब 550 करोड़ रुपए का हैंडीक्राफ्ट कारोबार सीधे प्रभावित हो रहा है। सबसे पहले समझें कैसे इतना असर पड़ा कंटेनर का भाड़ा बढ़ने और कच्चे माल की लागत में तेजी के कारण विदेशी खरीदार सतर्क हो गए हैं। कई बायर्स ने अपने ऑर्डर होल्ड कर दिए हैं। गल्फ कंट्री के ऑर्डर पेंडिंग हो गए। उदयपुर से व्यापारी अपना सामान गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के जरिए भेजता है। वहां कंटेनर 2000 डॉलर में जा रहे थे और अब युद्ध के नाम से फीस में 4000 डॉलर और जोड़ दिए। इस तरह 6000 डॉलर कंटेनर के हो गए, जो खरीददार को बहुत महंगा पड़ रहा है। 150 करोड़ का एक्सपोर्ट टर्नओवर उदयपुर से सालाना 150 करोड़ रुपए का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट होता है। हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र भंसाली बताते हैं कि- यहां से मेटल आइटम्स, हाथ से नक्काशी वाले एथनिक फर्नीचर यूरोपियन डिजाइन में बनाकर 86 देशों में भेजे जाते हैं। गल्फ देश हमारे बड़े खरीदार थे, लेकिन अब मिडिल ईस्ट के कारोबारियों ने नए ऑर्डर देना बंद कर दिया है और पुराने ऑर्डर को भी रोकने के लिए कहा है तो हर चीज पर असर आया है। टूरिस्ट की खरीदारी का टर्नओवर 400 करोड़ भंसाली कहते हैं कि 400 करोड़ रुपए का टर्नओवर सिर्फ टूरिस्ट की शॉपिंग से आता था। ओल्ड सिटी और शहर के रिटेल शोरूम में विदेशी पर्यटक जमकर खरीदारी करते थे। अब युद्ध के चलते पर्यटक आना ही कम हो गए। ये टूरिस्ट शहर के प्रमुख एम्पोरियम से डील करते हैं। इनसे करीब 400 करोड़ रुपए का व्यापार होता है और विदेशी टूरिस्ट को डील करने वाले ये व्यापारी अलग होते हैं, उनका भी व्यवसाय प्रभावित हुआ है। फैक्टरियों में काम ठप, मजदूर चले गए अध्यक्ष भंसाली बताते हैं कि हैंडीक्राफ्ट की फैक्ट्री के संचालन में भी बाधा है। उन्होंने कहा कि हमारी फैक्टरियों में दूसरे राज्यों से मजदूर आते थे। उनके घरों पर गैस सिलेंडर का संकट हो गया तो वे वापस चले गए। सिर्फ मेरी फैक्ट्री से 15 मजदूर चले गए। पूरा प्रोडक्शन अटक गया है। …. युद्ध के कारण प्रभावित सेक्टर की ये खबरें भी पढ़िए… 1. राजस्थान के सोजत में मेहंदी की फैक्ट्रियों में काम बंद:250 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर अटका, व्यापारी बोले-मजदूरों को घर भेजना पड़ रहा है अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं।(पूरी खबर पढ़ें) 2. राजस्थान में बंद हो सकती हैं सैकड़ों फैक्ट्रियां:हजारों मजदूरों को छुट्‌टी पर भेजा; युद्ध के कारण चावल, मसाले, कीमती पत्थर की डिमांड नहीं अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कोटा के सैंड स्टोन, राइस और मसाला इंडस्ट्रीज प्रभावित हुए हैं। डिमांड घटने से करीब 150 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट अटक गया है। सबसे ज्यादा असर स्टोन और राइस एक्सपोर्ट पर पड़ा है।(पूरी खबर पढ़ें)