उदयपुर में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा- पत्रकार को कभी दरबारी नहीं होना चाहिए। पत्रकार का निर्माण धर्म की स्थापना के लिए हुआ है। उन्होंने भारत के विकास मॉडल पर चर्चा करते हुए बताया- देश आज 8 फीसदी से ज्यादा की जीडीपी के साथ आगे बढ़ रहा है। त्रिपाठी ने कहा- पहले देश में सालभर में 40 हजार एमबीबीएस डॉक्टर निकलते थे। वहीं आज यह संख्या बढ़कर 88 हजार हो गई है। त्रिपाठी ने कहा- हिंदू संस्कृति में प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है और विकास के साथ पर्यावरण का तालमेल भारत की विशेषता है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में रविवार को विश्व संवाद केंद्र चित्तौड़ प्रांत की ओर से प्रांत स्तरीय पत्रकार सम्मान समारोह में उन्होंने यह कहा। देवर्षि नारद जयंती पर बप्पा रावल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पांच अलग-अलग श्रेणियों के पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इसमें दैनिक भास्कर (डिजिटल) के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश हिंगड को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उत्कृष्ट पत्रकार के रूप में सम्मान मिला। वहीं प्रिंट मीडिया श्रेणी में भूपेश दाधीच, बलराम मेहता को बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए उत्कृष्ट फोटोग्राफर का पुरस्कार दिया गया। सोशल मीडिया चैनल श्रेणी में अजमेर के निपुण भार्गव और स्तंभकार श्रेणी में भंवर सिंह कछवाहा को सम्मानित किया गया। 13 जिलों से 132 मिली एंट्रियां समारोह में इस बार पत्रकार सम्मान की पांच श्रेणियां रहीं। इसके लिए 13 जिलों से 132 प्रविष्टियां प्राप्त मिली। निर्णायक मंडल की ओर से चयनित उत्कृष्ट पत्रकारों को समारोह के मंच पर स्मृति चिन्ह, पुस्तक और 21-21 हजार रुपए की सम्मान राशि दी गई। एक दशक में 74 से बढ़कर 164 हुए एयरपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा- मुगल और अंग्रेज सत्ता के बाद स्वतंत्र होकर पंथनिरपेक्ष राष्ट्र बने भारत की धीमी आर्थिक गति को बौद्धिक बेईमानों ने हिंदू इकोनॉमी नाम दिया। देश ने कोविड महामारी और नोटबंदी की सख्ती के बावजूद आर्थिक प्रगति हासिल की है। त्रिपाठी ने कहा- स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से देश के चारों महानगरों को जोड़ने की योजना धरातल पर उतरी। हमारा देश का हिंदू चारों दिशाओं के तीर्थ करना चाहता था, लेकिन उससे पहले उसकी आस्था के बारे में नहीं सोचा गया। अब हमारे देश में 8 से लगाकर 35 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क बनाई जा रही हैं। देश के हर हिस्से में हवाई यात्रा की पहुंच है। एक दशक में एयरपोर्ट की संख्या 74 से बढ़कर 164 हो गई है। जिन सड़क मार्ग पर 12-15 घंटे लगते थे। वहां एक्सप्रेसवे से सफर 5-6 घंटे का रह गया है। रेलवे इंजन डीजल के बजाय इलेक्ट्रिक हो रहे हैं। लगभग 80 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई है। समय और ईंधन बचत से संसाधन की खपत में कमी होकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान हुआ है। आज के पत्रकार को बेबाक होना चाहिए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के कुलगुरु प्रो. सुरेश अग्रवाल ने कहा- जिस तरह नारद जी ने ऋषि दुर्वासा तक को खरी बात कह दी थी। उसी तरह आज के पत्रकार को भी बेबाक होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि आरएसएस के क्षेत्र प्रचार प्रमुख डॉ. महावीर कुमावत ने कहा- समाज की विषमताओं को दूर करना ही श्रेष्ठ भारत बनाने का मार्ग है। समारोह स्थल पर देवर्षि नारद के जीवन पर आधारित विशेष वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) भी दिखाई गई। साथ ही वहां भारतीय संविधान के चित्रों की प्रदर्शनी और एक बुक स्टॉल भी लगाया गया। जहां पाठकों ने हिंदुत्व, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किताबों में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम के दौरान शिक्षाविद गणेश कलाल ने देवर्षि नारद को विश्व का प्रथम संवाददाता बताते हुए उनके निष्पक्ष संवाद दर्शन पर प्रकाश डाला।