उदयपुर में एनडीपीएस के एक मामले में जांच अधिकारी ने 60 दिन में भी कोर्ट में चार्चशीट पेश नहीं की, जिससे आरोपी को जमानत मिल गई। मामला सूरजपोल थाने का है और आरोपी को 24 जनवरी को अवैध मादक पदार्थ के साथ पकड़ा गया था। बता दें कि सूरजपोल थाने में दो सीआई है। थाना इंजार्ज रतन सिंह हैं जबकि महेश जोशी का एसआई से सीआई प्रमोशन हुआ था लेकिन उन्हें अभी तक थाना आवंटित नहीं ​हुआ है। ये था पूरा मामला सूरजपोल थाना पुलिस ने 24 जनवरी 2026 को अवैध मादक पदार्थ के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आशिक खान उर्फ गोटी को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान उनकी जेब से एक थैली में व्हाइट रंग का पाउडर एमडीएमए मिला था, जिसका वजन 10.19 ग्राम था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज करते हुए जांच सीआई महेश जोशी को सौंपी थी। जोशी को जांच पूरी कर निर्धारित समय 60 दिन के अंदर कोर्ट में चार्जशीट पेश करनी थी, जो नहीं की गई। ऐसे गुरुवार को कोर्ट से ​आरोपी को जमानत मिल गई। कोर्ट ने सीआई की लापरवाही मानी आरोपी के वकील ओजस शाकद्वीपी ने बताया कि कोर्ट में सूरजपोल थाने के सीआई व जांच अधिकारी महेश जोशी को गुरुवार को कोर्ट में चार्जशीट पेश करनी थी। उनके चार्जशीट पेश नहीं करने को कोर्ट ने लापरवाही माना और आरोपी को जमानत दी। कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं कर पाए सीआई व जांच अधिकारी महेश जोशी की ओर से चार्जशीट पेश नहीं करने पर कई सवाल खड़े हो गए। कोर्ट ने जोशी से चार्जशीट पेश नहीं करने का कारण पूछा, तो वे कई कारण गिनाने लगे। उन्होंने कहा- MDMA 10 ग्राम से कम मिलता तो 180 दिन में पेश होती चार्जशीट पुलिस ने अपनी जांच में बताया कि आरोपी से 10.19 ग्राम एमडीएमए बरामद हुआ लेकिन जब इसकी एफएसएल जांच करवाई गई तो उसमें एमडीएमए की जगह इसके मेफीड्रोन मादक पदार्थ होने की पुष्टि हुई। 10 ग्राम से ज्यादा एमडीएमए बरामद होने पर 180 तक चार्जशीट पेश करने का प्रावधान है। इससे कम मिलने पर 60 दिन में। इस प्रावधान के हिसाब से एमडीएमए 10 ग्राम से कुछ मात्रा ज्यादा था। जांच में मेफिड्रोन की पुष्टि ने पुलिस के लिए परेशानी खड़ी कर दी और इसका फायदा आरोपी को मिल गया।