पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने एसीएस शिखर अग्रवाल के मामले में सीबीआई और ईडी जांच की मांग उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने सीएम भजनलाल शर्मा पर भी सवाल उठाए हैं। गहलोत ने कहा- शिखर अग्रवाल के नाम के अनुसार ही काम हुआ है। शिखर की तरह उन्होंने काम किया है। 40 विला एक साथ लेने की खबर आई, वह चौंकाने वाली है। मुख्यमंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मुख्यमंत्री को लगभग 3 साल हो जाएंगे और 3 साल में सबसे बड़ा घोटाला सामने आया तो यही आया है। गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री को खुद आगे आना चाहिए, उन पर आरोप लग रहे हैं। सीएमओ पर आरोप लग रहे हैं। एपीओ करने से काम नहीं चलने वाला है। IAS अफसरों की कंट्रोलिंग अथॉरिटी केंद्र सरकार होती है। इनको चाहिए कि सीबीआई और ईडी को जांच दें। ईडी सीबीआई को जांच देने से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जानबूझकर भ्रष्टाचार की हदें पार करते हुए दिलेरी के साथ में फैसले किए हैं गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मीटिंग करके उस कंपनी (शिखर अग्रवाल को विला देना वाली कंपनी) को छूट दी गई है। ये ऐसे आरोप हैं, जिनको कोई झूठा साबित नहीं कर सकता। जिन पर आरोप लगे हैं, वे भी इसे झुठला नहीं सकते। मुख्यमंत्री के एसीएस और पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर जो फैसले हुए हैं,वह अपने आप में साफ है। आईजी सीएमओ को मुंह बंद रखने के लिए उदयपुर आईजी की प्राइम पोस्टिंग दी गई गहलोत ने कहा- एक बार तो खबर आई थी। आईजी सीएमओ, एक ये अधिकारी (शिखर अग्रवाल), मुख्यमंत्री और उनके परिवार के लोग थे। उस वक्त आपस में मुख्यमंत्री के सामने छीनाझपटी हो गई थी। कोई कह रहा था कि थप्पड़ लगा दिया, छीनाझपटी हो गई। बहुत बड़ा कांड हुआ था। उसके बाद भी आईजी को उदयपुर भेजकर प्राइम पोस्टिंग दी गई। अगर पनिश करना होता तो ऐसी प्राइम पोस्टिंग नहीं देते। उनको प्राइम पोस्टिंग दी गई कि अपना मुंह बंद रखो, जो कांड यहां आपसे करवाए, आपके थ्रू यह घटना हुई है। मुख्यमंत्री के सामने उस पर आप अपना मुंह बंद रखोगे। इस शर्त के साथ में उनको उदयपुर का आईजी बनाया गया, अन्यथा उन्हें प्राइम पोस्टिंग देने का कोई कारण नहीं था। उदयपुर विकास प्राधिकरण करप्शन का बहुत बड़ा अड्डा, शिखर अग्रवाल ने कलेक्टर रहते वहां शुरुआत की गहलोत ने कहा- अगर उस समय आईजी को पनिश करना होता तो उदयपुर में आईजी नहीं लगाते। उदयपुर भ्रष्टाचार में जयपुर से पीछे नहीं है। उदयपुर विकास प्राधिकरण करप्शन का बहुत बड़ा अड्डा है। वहां जिसको भेजो वह चूकता ही नहीं है। जिसको भेजो उसके दलाल सब जगह घूमते हैं। खाली उदयपुर नहीं उदयपुर के बाहर भी दलाली करने के लिए रहते हैं। एसीबी की नजर से बच सके। वहां पर ये शिखर अग्रवाल जब कलेक्टर थे, तभी शुरुआत हुई है। यह पूरा खेल खेला जा रहा है, वह आपके सामने है। मुख्यमंत्री का रिश्तेदार प्रमोद शर्मा पुलिस रिकॉर्ड में भागा हुआ, लेकिन जयपुर में घूम रहा है गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री सरकार बनते ही जब मुझसे मिले थे तो मैंने अनुभव शेयर किए थे। मैंने कहा था कि आपको भी भगवान ने चांस दिया है तो सबको साथ लेकर चलें। करप्शन की ऐसी स्थिति कर दें कि लोग सोच ही नहीं सके कि आपके राज में करप्शन हो रहा है। आप अपने रिश्तेदारों को दूर रखें। यह मैंने उनको सलाह दी थी, मेरी बात मानते तो ज्यादा ठीक रहता। अभी उनके रिश्तेदारों के नाम चलते हैं। एक रिश्तेदार प्रमोद शर्मा कागजों में भागते फिर रहे हैं, पुलिस रिकॉर्ड में फरार है, लेकिन जयपुर में घूम रहे हैं। प्रमोद शर्मा मेरे वक्त भरतपुर में पकड़े गए, मुख्यमंत्री ने शपथ लेने से पहले ही उनका केस बंद करवा दिया था गहलोत ने कहा- यह प्रमोद शर्मा वही है, जो मेरे वक्त में भरतपुर में पकड़े गए थे। आपको आश्चर्य होगा मुख्यमंत्री को कल या परसों शपथ लेनी थी। आज उनके (प्रमोद शर्मा) केस को क्लोज कर दिया गया। हमने कोई टिप्पणी नहीं की थी, क्योंकि नए-नए मुख्यमंत्री शपथ लेंगे, सीएम बनकर खुद ही देख लेंगे। मेरे कारण से केस बंद क्यों हुआ या मेरे डर से हो गया। वो तो केस खोलने की छोड़ो अब तो नए-नए केस सामने आ रहे हैं। बेनीवाल ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ PM मोदी-शाह को लिखा लेटर IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर के परिवार से जुड़ा विला-कॉटेज खरीद मामले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने CBI और ED जांच कराने की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को लेटर लिखा है। पूरी खबर पढ़ें ये भी पढ़ें… विला-कॉटेज खरीद मामला,IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाया:IPS पत्नी के साथ खरीदी थी प्रॉपर्टी, फिर उसी कंपनी को लीज पर दी