प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव टालने के राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र पर 11 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। राज्य सरकार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके कहा था कि वर्तमान परिस्थितियों में दिसंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है और हर महीने की स्थिति का हवाला देते हुए समय मांगा था। बता दें कि हाईकोर्ट ने सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार की ओर से दायर प्रार्थना पत्र में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने में असमर्थता जताई गई थी। ऐसे में अब इस मामले पर सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। वहीं दूसरी ओर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिरिराज सिंह देवंदा की अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट 18 मई को सुनवाई करेगा। याचिका में राज्य चुनाव आयोग पर कोर्ट के आदेश की अवमानना करने का आरोप लगाया गया है। वहीं राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव टालने का अनुरोध किया है। वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा सरकार की ओर से बताया गया था कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा। इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा। प्रार्थना पत्र में सरकार ने कहा था कि कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी हैं कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराया जाना संभव नहीं है। सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूल, स्टाफ, ईवीएम सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर हाईकोर्ट से चुनाव आगे खिसकाने का अनुरोध किया है। राज्य चुनाव आयोग ने समर्थन किया राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव टालने का अनुरोध किया है। अपनी एप्लीकेशन में आयोग ने चुनाव की तिथियां बढ़ाने के सरकारी तर्कों का समर्थन करते हुए कहा है कि ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।