जयपुर के सीके बिरला हॉस्पिटल में रोबोटिक तकनिक से राजस्थान का पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। अलग ब्लड ग्रुप (एबीओ-इनकम्पेटिबल) होने के बावजूद पत्नी ने पति के लिए किडनी दान की और रोबोट से सर्जरी की गई। इस सर्जनी का नेतृत्व सीनियर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ.देवेंद्र के.शर्मा ने किया। यह ट्रांसप्लांट बूंदी निवासी एंड स्टेज रीनल डिजीज (ESRD) से पीड़ित मरीज पर किया गया, जो लंबे समय से डायलिसिस पर निर्भर था। मरीज की पत्नी ने किडनी दान करने की इच्छा जताई, लेकिन दोनों के ब्लड ग्रुप अलग थे। मरीज का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव, जबकि पत्नी का ए-पॉजिटिव था। इतना ही नहीं, दोनों का एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) मैच भी शून्य था, जिससे यह ट्रांसप्लांट बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया। डॉ. देवेंद्र शर्मा और उनकी टीम ने सर्जरी के दौरान पहले डोनर की किडनी को लैप्रोस्कोपिक डोनर नेफ्रेक्टोमी तकनीक से निकाला गया। इसके बाद रोबोटिक असिस्टेड रीनल एलोग्राफ्ट ट्रांसप्लांट के जरिए नई किडनी मरीज के शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. शील भद्र जैन और डॉ. अश्विनी शर्मा ने ऑपरेशन से पहले और बाद में दवाओं तथा इम्यूनोसप्रेशन प्रोटोकॉल का सफल प्रबंधन किया, जिससे मरीज का शरीर नई किडनी को स्वीकार कर सका। सर्जरी के तुरंत बाद नई किडनी ने सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया। सफल रिकवरी के बाद मरीज को स्वस्थ अवस्था में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया टीम के डॉ. अतुल और डॉ. रुचि, जबकि सर्जिकल टीम के डॉ. महेश जोशी और डॉ. प्रतीक का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।