ऊपर की तस्वीर में छड़ी का सहारा लेकर चल रही इस लड़की को देखिए। इस लड़की ने अपने अदम्य साहस, पारिवारिक संबल और कभी न टूटने वाली जिद से असहनीय पीड़ा तक को मात दे दी। 5 साल पहले एक हादसे ने पाली की वृषिका कुमावत के पैरों की गति थाम दी थी, लेकिन उसके सपनों की उड़ान को कम नहीं कर सकी।
बिस्तर पर लेटे-लेटे पढ़ाई करते हुए वृषिका ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के 12वीं कॉमर्स में 93.40% अंक हासिल कर इतिहास रच दिया। संघर्ष की एक नई मिसाल पेश की है।
कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो किस्मत की लकीरें भी रास्ता बदल लेती हैं। इस लड़की ने इसको सच कर दिखाया है। 15 फीट नीचे गिरी, कमर के नीचे का हिस्सा हुआ लकवाग्रस्त
पाली के दुर्गा कॉलोनी की रहने वाली वृषिका के लिए 5 अगस्त 2021 की वो तारीख किसी काल से कम नहीं थी। छत पर पैर फिसलने से वह 15 फीट नीचे गिरी। रीढ़ की हड्डी में क्रैक आया और शरीर का निचला हिस्सा बेजान हो गया।
जोधपुर से अहमदाबाद तक इलाज चला, लाखों खर्च हुए, लेकिन वह बिस्तर से नहीं उठ पाई। डॉक्टरों ने लंबे बेड रेस्ट की सलाह दी, पर वृषिका ने इसे अपनी नियति मानने से इनकार कर दिया। नहलाने से लेकर वॉशरूम ले जाने तक का सारा काम मां करती
वृषिका की स्थिति ऐसी थी कि वह खुद के कपड़े तक नहीं बदल सकती थी। मां संगीता देवी उसे नहलाने से लेकर वॉशरूम ले जाने तक का सारा काम करती हैं। मां ने कहा भी- बेटा, ठीक होने के बाद पढ़ लेना, लेकिन वृषिका ने ठान लिया था कि साल खराब नहीं होने देगी। पिता का हौसला, टीचर्स का साथ
वंदे मातरम स्कूल के शिक्षकों ने वृषिका की लगन देख हाथ बढ़ाया और जरूरत पड़ने पर घर आकर उसे पढ़ाया।
पेशे से फोटोग्राफर पिता रमेश कुमार ने अपनी जमा-पूंजी इलाज में लगा दी और हर पल बेटी का संबल बने रहे। वृषिका कहती है- मेरा संघर्ष तो कुछ नहीं, माता-पिता का संघर्ष मुझसे कहीं बड़ा है।
परिस्थितियां शरीर को बांध सकती हैं, लेकिन आपके मस्तिष्क की उड़ान को नहीं। मैंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा क्योंकि मेरे माता-पिता मेरी ताकत बनकर खड़े थे। अब CA बनकर माता-पिता के आंसू पोंछना है
जब रिजल्ट आया और 93.40% का आंकड़ा स्क्रीन पर चमका, तो पिता रमेश कुमार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। स्कूल स्टाफ ने साफा पहनाकर और मुंह मीठा करवाकर वृषिका का स्वागत किया।
आज वृषिका छड़ी के सहारे चलती है, लेकिन उसका लक्ष्य बहुत ऊंचा है। वह अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनकर अपने माता-पिता की सेवा करना चाहती है। साथ ही, उन जैसे बच्चों के लिए प्रेरणा बनना चाहती है जो शारीरिक बाधाओं के आगे झुक जाते हैं। --- 12वीं रिजल्ट की ये खबरें भी पढ़िए… 1- पिता ने पैसे उधार लेकर पढ़ाया, बेटी की 99% बनी:ऑटो ड्राइवर के बच्चों के 97.80% अंक आए; जुड़वा भाइयों ने 97% व 96.4% नंबर हासिल किए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं विज्ञान, कॉमर्स और आट्र्स का रिजल्ट जारी होते ही जयपुर जिले के होनहारों के कई किस्से सामने आए हैं। किसी ने पैसे उधार लेकर बेटी को पढ़ाया तो किसी स्टूडेंट ने स्कॉलरशिप के पैसों से पढ़ाई की। पढ़िए पूरी खबर... 2- एग्जाम के बाद छात्रा की मौत,12वीं में 93.80% मार्क्स आए:बेटी की तस्वीर सीने से लगाकर रो पड़ी मां, बोलीं-इंजेक्शन लगवाकर परीक्षा देने जाती थी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(RBSE) ने मंगलवार को 12वीं का रिजल्ट जारी किया। श्रीगंगानगर में छात्रा की मौत के 10 दिन बाद आए रिजल्ट को देखकर मां फफककर रो पड़ीं। बेटी की तस्वीर को सीने से लगाकर बोलीं- नकिता शुगर की पेसेंट थी। पढ़िए पूरी खबर...