भास्कर संवाददाता | टोंक जिले में मानसून की बेरुखी लगातार बनी हुई है। मौसम विभाग की ओर से यलो अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद जिले के अधिकांश हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी। कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी जरूर हुई, लेकिन छितराई बारिश का असर कृषि और जल स्रोतों पर नजर नहीं आया। दिनभर बादल छाए रहने और तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिली। हालांकि अधिकतम तापमान में पिछले दिनों की तुलना में करीब 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 15 जून से अब तक जिले में सामान्य औसत वर्षा का केवल 17.72 प्रतिशत ही पानी बरसा है। इसका असर जिले के बांधों और जलाशयों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां जलस्तर बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे घट रहा है। जून माह में भी सामान्य से काफी कम बारिश हुई थी और अब जुलाई के 20 दिन बीतने के बावजूद अच्छी वर्षा का इंतजार बना हुआ है। कम बारिश का सबसे अधिक असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है। गत वर्ष इस समय तक जिले में लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन इस बार अनेक स्थानों पर खेत अब भी खाली पड़े हैं। किसान पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि सोयाबीन, मक्का, बाजरा और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई गति पकड़ सके। जिन किसानों बुवाई कर दी है। उनकी फसल खराब होने के कगार पर है।