वन्यजीव अभयारण्यों और जंगलों में इस साल वन्यजीवों का कुनबा कितना बढ़ा है, इसका आकलन करने के लिए वन विभाग ने 1 मई की शाम को शुरू होने वाली वन्यजीव गणना की तैयारी शुरू कर दी है। इस गणना को लेकर गुरुवार को वन भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में करीब 79 अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उदयपुर वाईल्डलाइफ विंग के डीएफओ यादवेन्द्र सिंह चुण्डावत ने बताया कि 1 मई की शाम 5 बजे से शुरू होकर 2 मई की शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटों तक यह गणना चलेगी। इस बार गणना के समय में बदलाव किया गया है। आमतौर पर वन्यजीव गणना सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 8 बजे तक होती थी, लेकिन इस वर्ष पूर्णिमा (1 मई) को गणना शाम से शुरू होकर अगले दिन की शाम तक चलेगी। वाटर हॉल पद्धति का होगा उपयोग वन्यजीवों की गिनती के लिए प्रसिद्ध वाटर हॉल तकनीक अपनाई जाएगी। इसके पीछे यह वैज्ञानिक तर्क है कि भीषण गर्मी के मौसम में सभी वन्यजीव 24 घंटे के भीतर कम से कम एक बार पानी पीने के लिए जलाशयों (वाटरहोल) पर जरूर आते हैं। मचानों पर बैठकर गणना करने वाले कर्मचारी पानी पीने आने वाले हर जानवर का रिकॉर्ड दर्ज करेंगे। इन क्षेत्रों में होगी गणना और अभ्यास गणना मुख्य रूप से जयसमन्द वन्यजीव अभयारण्य, सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, फुलवारी की नाल वन्यजीव अभयारण्य में होगी। मुख्य गणना से 2 दिन पहले अभ्यास सत्र भी आयोजित किया जाएगा, ताकि गणनाकर्ता अपने क्षेत्र, एनिमल ट्रेल्स (जानवरों के आने के रास्ते) और उनके व्यवहार को अच्छी तरह समझ सकें। प्रशिक्षण में समझाई बारीकियां प्रशिक्षण सत्र के दौरान सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक डॉ. सतीश शर्मा और सज्जनगढ़ जैविक उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु व्यास ने कर्मियों को मचान बनाने की ऊंचाई, वन्यजीवों की पहचान और गणना के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से बताया।