महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर महिला आरक्षण कानून को लागू करने में देरी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने भाजपा पर झूठ और भ्रम फैलाने तथा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए तत्काल कानून लागू करने की मांग की है। कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अपनी भूमिका को ऐतिहासिक बताया है। पार्टी का कहना है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में उसकी भूमिका हमेशा अग्रणी रही है। कांग्रेस के अनुसार, पंचायती राज और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान वर्ष 1992 में संविधान के 73वें और 74वें संशोधन के जरिए लागू किया गया था, जिसने महिलाओं को जमीनी स्तर पर सशक्त किया। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि महिला आरक्षण विधेयक पहली बार वर्ष 1996 में संसद में पेश किया गया था। वर्ष 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में इसे राज्यसभा से पारित कराया गया था, हालांकि यह लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। वर्ष 2023 में पारित "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" को लेकर कांग्रेस ने कहा कि इस कानून को पारित कराने में उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसे तत्काल लागू करने की मांग की थी। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों से जोड़कर लागू करने में जानबूझकर देरी की है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि जब यह कानून 2023 में ही पारित हो चुका था, तो इसे लागू करने में तीन वर्ष का विलंब क्यों किया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक मानचित्र को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही कांग्रेस ने भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि वह अपने संगठन और चुनावों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती है। कांग्रेस ने दावा किया कि उसने अतीत में कई महिला नेताओं को शीर्ष पदों पर अवसर दिया है। कांग्रेस ने मांग की है कि महिला आरक्षण को वर्तमान लोकसभा की 543 सीटों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसे परिसीमन से न जोड़ा जाए। साथ ही, जातीय जनगणना जल्द पूरी कर महिलाओं, विशेषकर ओबीसी वर्ग की महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है। अंत में कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण को महिलाओं का अधिकार मानती है और इसे लागू कराने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।