राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय, बारां में गुरुवार को वर्ल्ड एनाटॉमी डे और कैडेवरिक ओथ समारोह मनाया गया। इसका मकसद नए एमबीबीएस छात्रों को एनाटॉमी का महत्व और मेडिकल पेशे की गरिमा बताना था। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुश आसोपा की देखरेख में पहले साल के छात्रों को कैडेवरिक शपथ दिलाई गई। छात्रों ने मानव शरीर के प्रति सम्मान, गोपनीयता और आभार बनाए रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि मेडिकल शिक्षा में कैडेवर सिर्फ पढ़ाई का सामान नहीं, बल्कि भावी डॉक्टरों का 'पहला गुरु' है। समारोह में आधुनिक एनाटॉमी के जनक एंड्रियास वेसालियस के जीवन और उनके योगदान पर भी जानकारी दी गई। फैकल्टी ने बताया कि कैसे वेसालियस ने सीधे देखकर चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी। कार्यक्रम में प्रिंसिपल डॉ. सी. पी. मीणा और एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. अरविंद गोयल मौजूद रहे। डॉ. मीणा ने कहा कि एनाटॉमी चिकित्सा की बुनियाद है, सफल डॉक्टर बनने के लिए ज्ञान के साथ संवेदनशील होना भी जरूरी है। डॉ. गोयल ने छात्रों को मेडिकल नैतिकता और मूल्यों को अपनाने की सीख दी।