राजस्थान में घर खरीदना दिन-ब-दिन महंगा हो रहा है। 50 लाख की प्रॉपर्टी पर 4.10 लाख तो सिर्फ सरकारी स्टांप और रजिस्ट्रेशन में खर्च होते हैं। अगर 40 लाख का होम लोन लिया तो बैंक लीगल, टीआईआर और प्रोसेसिंग फीस और मॉरगेज डीड रजिस्ट्री पर 53 हजार और खर्च हो जाएंगे। यानी 4.63 लाख तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इसमें बड़ा हिस्सा सरकारी स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क का है। इस साल सरकार ने मॉरगेज डीड रजिस्ट्री का खर्च और बढ़ा दिया। ऐसे में अतिरिक्त खर्च राशि के लिए भी लोन लिया तो यह राशि दस लाख रुपए तक यानी मकान की कीमत का करीब 20 फीसदी बैठेगी। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट रितेश अग्रवाल का कहना है कि नई व्यवस्था में खरीदार को मकान की रजिस्ट्री के अलावा लोन दस्तावेजों के लिए भी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके तहत लोन दस्तावेजों पर 0.5% रजिस्ट्रेशन फीस ली जा रही है। भास्कर एक्सप्लेनर - ऋषभ गोयल, रियल एस्टेट एक्सपर्ट बैंक अपने हित में लीगल जांच कराता है, ग्राहक पर बोझ क्यों? वेल्युएशन-लीगल जांच बैंक की जिम्मेदारी, फिर चार्ज क्यों दे? बैंक होम लोन देने से पहले संपत्ति का बाजार मूल्य तय कराता है। कागजात की कानूनी जांच करवाता है, ताकि कर्ज सुरक्षित रहे। यानी यह प्रक्रिया बैंक के जोखिम प्रबंधन का हिस्सा है। इसके बावजूद वैल्युएशन, लीगल और टीआईआर के नाम पर अलग शुल्क ग्राहक से वसूला जाता है। जब यह जांच बैंक अपने हित में करा रहा है, तो इसकी लागत ग्राहक पर क्यों डाली जाए? बैंक का काम लोन देना है, फिर प्रोसेसिंग फीस क्यों? बैंक होम लोन पर 8 से 9% सालाना ब्याज लेता है। इसी ब्याज में आवेदन की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन, क्रेडिट मूल्यांकन और लोन स्वीकृति जैसी पूरी प्रक्रिया शामिल मानी जाती है। फिर भी अलग से प्रोसेसिंग फीस वसूली जाती है। जब ब्याज बैंक की कमाई है, तो लोन प्रोसेस करने का अलग बिल क्यों? प्रॉपर्टी की एक बार रजिस्ट्री हो चुकी, फिर मॉरगेज रजिस्ट्री पर अलग शुल्क क्यों? मकान की सेल डीड पहले ही स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस देकर सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी होती है। इसके बाद होम लोन लेते समय उसी संपत्ति पर बैंक के अधिकार को दर्ज करने के लिए मॉरगेज डीड की अलग रजिस्ट्री करानी पड़ती है, जिस पर 0.25% स्टांप ड्यूटी और 0.5% रजिस्ट्रेशन फीस लगती है। सरकार का तर्क है कि यह एक अलग कानूनी दस्तावेज है, इसलिए अलग शुल्क देय है। लेकिन एक ही मकान पर दूसरी बार रजिस्ट्रेशन फीस लेना क्या सही है? लोन की प्रोसेसिंग फीस नहीं लेंगे तो बैंक का ब्याज दर बढ़ानी पड़ेगी। दरअसल, कर्ज देने में भी बैंक में मेन पावर समेत बैंक का खर्च होता है। इस लागत की वसूली प्रोसेसिंग फीस से की जाती है। -देव आनंद, डीजीएम, एसबीआई