कस्बे के 500 साल पुराने नगर सेठ मोर मुकुट श्री बंशीवाला मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी दो दिवसीय महोत्सव शुरू हुआ। पुजारी महावीर प्रसाद पाराशर ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव दुर्लभ एवं विशेष ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया गया। जन्माष्टमी पर कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और शुक्रवार का संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और शुक्रवार या सोमवार के मेल को "जयंती योग" कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ व फलदायी माना गया है।द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय भी ऐसा ही संयोग बना था। इस बार चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेगा, जिससे मानसिक शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि मानी जाती है। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि और सुकर्मा योग भी बन रहे हैं, जिससे व्रत, पूजा, जप और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष फल प्राप्त होगा।जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मुख्य पूजा निशीथ काल में की गई। इस दौरान सभी मंदिरों व श्री बंशीवारा मंदिर में भगवान का पंचामृत अभिषेक, श्रृंगार,भजन कीर्तन महाआरती कर माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया।